संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी नगीना तहसील क्षेत्र में दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां के लोगों के लिए सुलभ यातायात व्यवस्था आज भी उपलब्ध नहीं है। इन गांवों के लोगों को आज भी बस या थ्री व्हीलर पकड़ने के लिए निजी वाहनों या पैदल से मीलों चलना पड़ता हैं।
नगीना से खुशहालपुर मठेरी, अलेहदादपुर, खानपुर, चमरोला, शेखपुरा तुर्क उर्फ सैन्नावाला, भोगली, मखूवाला, कमालपुर भोगा, रामपुर छज्जमल, गढ़ी मिलक आदि ऐसे तमाम गांव है, जिन गांव के ग्रामीणों को रोडवेज या प्राइवेट बस पकड़ने के लिए कई-कई किलोमीटर पैदल या निजी वाहनों से मुख्य मार्ग तक जाना पड़ता हैं। इनमें से कुछ गांव की दूरी तो नगीना से 5 से 10 किलोमीटर तक हैं। इनमें से कुछ गांव में तो ई-रिक्शा की सुविधा भी नहीं हैं।
चलना पड़ता है नौ किलोमीटर
नगीना तहसील में उत्तराखंड राज्य की सीमा पर स्थित बढ़ापुर क्षेत्र का आखिरी गांव रामजीवाला है। इन गांवों के लोगों को करीब 9 किलोमीटर दूर तक पैदल या निजी वाहन से ही बढ़ापुर जाना पड़ता हैं। इन गांवों के विद्यार्थी इतनी लंबी दूरी को पैदल या साइकिल से ही तय करते हैं।
छह किलोमीटर दूर निजी वाहन से करते है तय
बढ़ापुर क्षेत्र के ग्राम अफजलपुर भाऊ उर्फ भाऊवाला के ग्रामीण बस पकड़ने के लिए छह किलोमीटर दूर निजी वाहन से ही बढ़ापुर जाते है। कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम राजोपुर से माहेश्वरी जट तक बस या थ्री व्हीलर पकड़ने के लिए ग्रामीणों को साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी निजी वाहनों से ही पूरी करनी पड़ती है।
ग्रामीण बोले, प्रशासन को समस्या दूर करनी चाहिए
ग्राम अल्लेहदादपुर निवासी बंटी का कहना हैं कि उनके गांव से नगीना की दूरी करीब 7 किलोमीटर है। नगीना आने के ग्रामीणों को निजी वाहनों का ही प्रयोग करना पड़ता है। जिला प्रशासन को समस्या दूर करनी चाहिए।
खुशहालपुर मठेरी निवासी उमेंद्र कुमार का कहना है कि उनके गांव से नगीना आने की दूरी करीब 5 किलोमीटर है। इसके लिए रास्ते में कोई बस या थ्री व्हीलर की व्यवस्था नहीं है।
ग्राम भाऊवाला निवासी उत्तम कुमार पाल का कहना है कि हमारे गांव से यातायात व्यवस्था पूरी तरह खराब है। बढ़ापुर जाने के लिए सिर्फ निजी वाहन ही एक सहारा है।
ग्राम रामजीवाला निवासी मोहम्मद हनीफ का कहना है कि कहीं बाहर जाने के लिए बस पकड़ना आज भी उनके गांव के लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। इसके लिए करीब नौ किलोमीटर निजी वाहनों से बढ़ापुर जाना पड़ता है।
ग्राम राजोपुर निवासी सौरभ काकरान का कहना है कि उनके गांव के लोगों को बस पकड़ने के लिए साढ़े तीन किलोमीटर दूर माहेश्वरी जाना पड़ता है। इसके लिए निजी वाहन ही एक सहारा है।