बिजनौर में गंगा में दिखी डॉल्फिन।
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बिजनौर में पतित पावनी मां गंगा की धारा में इस बार डॉल्फिन का कुनबा बढ़ गया है। डॉल्फिन की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। पिछले साल डॉल्फिन की संख्या 30 थी। इस बार सर्च अभियान में बिजनौर में दो बच्चे भी मिले हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ व उत्तर प्रदेश वन विभाग के अधिकारी भी गदगद हैं।
गंगा में डॉल्फिन की संख्या पता लगाने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ(वर्ल्ड वाइल्ड फंड) व उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा ‘मेरी गंगा, मेरी सूंस’ के अंतर्गत संयुक्त अभियान चलाया गया। अभियान बिजनौर के बालावाली गंगा घाट से नरौरा बैराज तक चलाया गया था। अभियान में टीम को पिछले साल 30 डॉल्फिन मिली थीं। इस बार भी टीम द्वारा गंगा बैराज में अभियान चलाया गया। डब्ल्यूडब्ल्यूफ के परियोजना अधिकारी संजीव यादव व सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर मोहम्मद शाहनवाज खान के निर्देशन में हुए डॉल्फिन की गणना में इस बार 32 डॉल्फिन मिली हैं, जिसमें दो शावक भी हैं। इनकी आयु करीब एक साल होने का अनुमान है।
बिजनौर क्षेत्र में गणना में पहली बार टीम को डॉल्फिन के शावक मिले हैं। टीम में बुलंदशहर में चले आखिरी अभियान में डीएफओ बुलंशहर वीके जैन, रेंजर योगेश कुमार भी शामिल रहे। डीएफओ अनुज सक्सेना, कमल किशोर, दयानंद गौतम आदि मौजूद रहे।
तरंगों से करती हैं शिकार
बिजनौर। गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन को गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन कहते हैं। यह समंदर में मिलने वाली डॉल्फिन से अलग होती हैं। गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन अंधी होती हैं।
ये गंगा में मछलियां खाती हैं और शरीर से निकलने वाली तरंगों से शिकार को पकड़ती हैं। मादा डॉल्फिन की लंबाई पौने दो मीटर तक होती है। नर डॉल्फिन मादा से छोटा होता है।
सामाजिक प्राणी हैं डॉल्फिन
बिजनौर। गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन सामाजिक प्राणी होती हैं। यह कभी कभी नाव या पानी में तैरने वाले मनुष्यों पास आकर उनके साथ तैरने लगती हैं। यह आक्रामक प्रवृत्ति की नहीं होती हैं और मनुष्य पर हमला नहीं करती हैं।