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नहीं मानते शासनादेश, स्वास्थ्य विभाग में चल रहा शपथपत्र का खेल

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बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग में शासनादेश के बावजूद शपथ पत्र का खेल चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से अप्रशिक्षित चिकित्सक को नोटिस दिया जाता है, लेकिन बाद में शपथ पत्र लेकर उन्हें अभयदान दिया जा रहा है। करीब एक दशक पहले ही शासन ने शपथपत्र लेने पर रोक लगा दी थी और निर्देश दिए थे कि अप्रशिक्षित चिकित्सक मिलने पर सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके बावजूद भी जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शपथ पत्र लेकर खानापूर्ति कर रहे हैं।
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जिले में लगभग पांच हजार से अधिक अप्रशिक्षित चिकित्सक होने की चर्चा स्वास्थ्य विभाग में है। जिले में अप्रशिक्षित चिकित्सक पर कार्रवाई के लिए पांच-पांच नोडल अधिकारी बना दिए गए हैं, लेकिन कार्रवाई बहुत कम होती है। जिले की नजीबाबाद, नगीना, धामपुर, चांदपुर तहसील में स्वास्थ्य विभाग ने मई में 36 अप्रशिक्षित चिकित्सक को नोटिस दिया था। इनमें से पांच चिकित्सकों ने जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के यहां से पंजीकरण करा रखा है, जबकि 10 अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील किया है। साथ ही एक अप्रशिक्षित चिकित्सक पर एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं 20 अस्पतालों से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शपथ पत्र ले लिए हैं, जिनमें लिखा है कि हम अस्पताल बंद कर रहे हैं और भविष्य में अस्पताल नहीं चलाएंगे। सूत्राें का कहना है कि इनमें से अधिकांश अस्पताल अभी भी संचालित हैं।
जिले में पांच नोडल अधिकारी
जिले में अप्रशिक्षित चिकित्सकों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते जिले में एक नहीं बल्कि पांच नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। जिन्हें अलग-अलग तहसीलों का नोडल बनाया हुआ है। लेकिन कार्रवाई पर नजर डालें तो पांच नोडल अधिकारियों के हिसाब से कार्रवाई बहुत कम है। यह कार्रवाई भी तब है, जब सभी नोडल अधिकारी रोजाना जिले में अप्रशिक्षित चिकित्सक पर कार्रवाई करने के लिए गाड़ी दौड़ाते रहते हैं।
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नोटिस के बाद एफआईआर का नियम: सीएमओ
सीएमओ डॉ. विजय कुमार गोयल का कहना है कि अप्रशिक्षित चिकित्सक पकड़े जाने पर अब एफआईआर का नियम है। जिसके चलते अप्रशिक्षित चिकित्सक को नोटिस देने के बाद शपथ पत्र नहीं लिया जाएगा। हालांकि सिर्फ नोटिस तक सीमित रहने और कार्रवाई न करने पर जवाब देने के बजाए उन्होंने कहा कि नोडल अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं।
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