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साधारण परिवारों से निकले जिले के टॉपर

Mon, 29 May 2017 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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बिजनौर में कड़ा परिश्रम रंग जरूर लाता है। सीबीएसई की 12वीं के परीक्षा ने इस बात को साबित कर दिया है। जिला टॉप करने वाली काजल रानी और तीसरे नंबर पर रहने वाला वासुदेव साधारण परिवारों से हैं। जिला टॉप करने वाली काजल रानी के पिता साधारण किसान हैं तो वासुदेव ने ये मुकाम अपनी मां की प्रेरणा से पाया है। काजल आगे चलकर सीए तो वासुदेव सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहता है। दोनों अपनी सफलता का श्रेय अपने परिजनों को देते हैं।
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गांव केवलपुर निवासी काजल रानी के पिता गजेंद्र सिंह साधारण किसान हैं।

उसके पिता गजेंद्र सिंह व मां बीना देवी दोनो हाईस्कूल तक ही पढ़े हैं। लेकिन दोनों ने अपनी बेटी काजल रानी और बेटे नीतीश को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। काजल रानी बताती हैं कि उसके माता पिता ने कभी बेटा बेटी का भेदभाव नहीं किया। उसे हमेशा पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। काजल के अनुसार वह स्कूल के अलावा घर पर केवल दो घंटे ही पढ़ती थी। उसका मानना है कि कई-कई घंटे रटने से अच्छा है दो घंटे ढंग से पढ़ना। अगर कांसेप्ट क्लियर हो तो कभी दिक्कत नहीं आती है। काजल आगे चलकर सीए बनना चाहती है। वह अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, स्कूल प्रबंधक डा.बीरबल सिंह, प्रधानाचार्य अंकुर त्यागी, नरोत्तम सिंह, मीनाक्षी राजपूत को देती है।

गांव चतरपुर भोजकुशल उर्फ नंगला निवासी वासुदेव के पिता डा.वीरेंद्र सिंह की कई साल पहले एक हादसे में मौत हो गई थी। वासुदेव की माता कविता देवी ने अपने दोनों बच्चों को पढ़ाने के लिए बिजनौर आ गईं और एक मकान में किराए पर रहने लगीं। मां की अपने प्रति ममता और समर्पण को देखकर वासुदेव मन लगाकर पढ़ता रहा। वासुदेव के परिवार की पृष्ठभूमि खेती ही है। वासुदेव के अनुसार    वह स्कूल के अलावा घर पर भी छह से सात घंटे तक पढ़ता था। कोई चैप्टर ऐसा नहीं छोड़ा जो कई-कई बार पढ़ा न हो। वासुदेव आगे चलकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहता है। वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता व अन्य परिजनों को देता है।
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