जिला पंचायत ने पौराणिक महत्व वाले पांच तालाब गोद लिए
बिजनौर। जिले में एतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले पांच तालाबों की सूरत बदलने जा रही है। इन्हें अमृत सरोवर में तब्दील किया जाएगा। योजना को धरातल पर लाने के लिए जिला पंचायत ने तालाबों का सर्वे कर लिया है। जिनकी डीपीआर तैयार की जा रही है। अमृत योजना के तहत दो से ढाई महीने में तालाबों की दशा बदल दी जाएगी। इनमें गंदा पानी नहीं बल्कि साफ और निर्मल पानी लबालब रहेगा। घूमने के लिहाज से पैदल पथ, लाइटिंग की व्यवस्था भी की जानी है। अमर उजाला ने पौराणिक और ऐतिहासिक तालाबों को लेकर अभियान चलाया, जिसके बाद जिला पंचायत ने ऐसे पांच तालाबों को गोद ले लिया।
हाल ही में जिला पंचायत के अधिकारियों और इंजीनियर की टीम ने जिले के तमाम तालाबों का निरीक्षण किया है। इनमें मंडावर स्तिथ कनवा ताल, झारखंडी मंदिर का तालाब, मित्रसेन की जौहड़ी, औलियापुर और मुकरपुरी के तालाब को चिह्नित कर लिया गया है। इनका निरीक्षण किया जा चुका है और रिपोर्ट तैयार हो रही है। कार्ययोजना बनाकर शासन को भी भेजी जानी है। बता दें कि शासन ने इस आजादी के अमृत महोत्सव के तहत दिशा निर्देश जारी किए थे। जिनमेें जिला पंचायत को पांच तालाबों की सूरत बदलनी हैं। अमृत सरोवर बनाने के लिए यह भी ध्यान रखा जाएगा कि आबादी का गंदा पानी तालाब में नहीं जा पाएगा। अगर कहीं गंदा पानी तालाब में डाला जा रहा है तो उसे बंद किया जाएगा। साथ ही अधिक पानी होने की दशा में निकासी का प्रबंध भी रहेगा। अमृत सरोवर का मकसद ही तालाब में साफ और निर्मल पानी का भंडारण सालभर बनाए रखना है।
किनारे पर लगेंगे पेड़ पौधे
अमृत सरोवर बनाए जाने के साथ किनारों पर पौधारोपण भी कराया जाना है। पौध के विकसित होकर पेड़ बनने तक इनकी देखभाल भी की जाएगी। जिससे पर्यावरण भी सुधर सके और अमृत सरोवर हरा भरा भी रहे। घूमने के लिए तालाब के चारों ओर पाथ बनाया जाना है। जिसे परिक्रम पथ का नाम दिया गया है।
जिले के सात तालाबों का निरीक्षण किया गया, जिसमें पांच तालाब चिह्नित कर लिए गए हैं। इन्हें अमृत सरोवर बनाया जाना है। अमृत सरोवर में साफ और निर्मल पानी भरा जाएगा। घूमने के लिए पथ, लाइटिंग और पौधारोपण किया जाना है - श्याम बहादुर शर्मा, एएमए, जिला पंचायत