फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लॉक डाउन खुलने के बाद रफ़्तार पकड़ेंगे जिले के उद्योग

विज्ञापन
विज्ञापन
लॉकडाउन खुलने के बाद रफ्तार पकड़ेंगे जिले के उद्योग
विज्ञापन

बिजनौर। कृषि प्रधान जिले में कई और उद्योग भी संचालित होते हैं। उद्योगों को लॉकडाउन में बंद कर दिया गया था, लेकिन बाद में इनके संचालन को हरी झंडी दे दी गई। उद्योगों के चलने से मजदूूरों को पलायन करने के लिए मजदूर नहीं होना पड़ा। केवल चीनी मिलों में ही कुछ मजदूर दूसरे राज्यों के काम करते हैं। 4051 में से 2200 से अधिक उद्योगों को चलने की अनुमति मिल चुकी है।
जिले में करीब 335 ईंट भट्ठे संचालित हैं, इन पर कुछ लोकल के तो कुछ दूसरे राज्यों के मजदूर काम करते हैं। एकांत में होने के चलते ईंट भट्ठों के संचालन पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा, लेकिन बारिश की वजह से भट्ठों का संचालन प्रभावित हो रहा है। शुरूआत में जब ईंट भट्टे बंद थे तो शहरों में निर्माण कार्य बंद हुआ लेकिन गांवों में चलता रहा। बारिश की वजह से माल कम बनने से ईंट के दाम चार हजार से बढ़कर साढ़े पांच हजार रुपये प्रति एक हजार हो गए। अब लॉक डाउन खुलेगा तो ईंटों का बाजार फिर से चल निकलेगा।
विज्ञापन

ईंट भट्टा मालिक अमजद का कहना है कि लॉक डाउन नहीं बारिश की वजह से काम प्रभावित हुआ है। बारिश की वजह से ईंधन भी गीला है। इस वजह से अब काफी ईंट भट्टे बंद भी हो रहे हैं।
काष्ठकला जिले का गैर कृषि से जुड़ा सबसे बड़ा उद्योग है। इसकी जिले में 800 से अधिक इकाई संचालित हैं। लगभग सभी उद्यमियों ने अपनी इकाई चलाने की अनुमति ले ली लेकिन अभी चलाए नहीं हैं। इस उद्योग से जुड़े सभी कारीगर लोकल के हैं। काष्ठकला के आइटम थोड़े महंगे होते हैं। इस समय लॉकडाउन से लोगों की आमदनी प्रभावित है। इस वजह से काष्ठकला उद्यमी अभी अपने केंद्र संचालित नहीं कर रहे हैं। केवल इस केंद्र संचालित किए गए हैं। नगीना डवलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष इरशाद मुल्तानी का कहना है कि काष्ठकला का बाजार निर्यात पर आधारित है। जो ऑर्डर मिले थे वे अब पेंडिंग में रखे गए हैं। लोकल के लिए ही थोड़ा काम किया जा रहा है। अभी काष्ठकला उद्योग प्रभावित रहेगा। थोड़े दिन बाद काष्ठकला का बाजार रफ्तार पकड़ेगा।
जिले में नौ चीनी मिल तथा करीब एक हजार कोल्हू और क्रेशर चलते हैं। ये अब तक चल रहे हैं। इनमें पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार केे कुछ मजदूर काम करते हैं। लॉक डाउन के दौरान भी चीनी मिलों व कोल्हू चलते रहे। इससे मजदूरों को किसी तरह की दिक्कत नहीं आई। मिलों को कच्चे माल यानि गन्ने की कमी नहीं रही। अब इस महीने मिल व कोल्हू चलने बंद होंगे। इसके बाद ही ये मजदूर वापस लौटेंगे। बिजनौर चीनी मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह का कहना है कि चीनी मिल से कोई मजदूर अभी काम छोड़कर नहीं गया है। मिल का संचालन बंद होने के बाद ही ये अपने घरों को जाएंगे। मिलों में मजदूरों को रोजगार मिलता रहा।
विज्ञापन

-------------कोट
उपायुक्त उद्योग अमिता वर्मा रस्तोगी का कहना है कि उद्यमियों को उद्योग चलाने की अनुमति दी जा रही है। कारीगरों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी। अगर किसी को कोई परेशानी होती है तो विभाग की ओर से उन्हें सुविधा दी जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें