फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

70 से घटकर 25 किमी हुई दूरी, मगर सड़क बनना भी जरूरी

विज्ञापन
मंडावर क्षेत्र के गांव इंछावाला बनाया जा रहा झोपड़ीनुमा स्कूल। - फोटो : BIJNOR
विज्ञापन
70 से घटकर 25 किमी हुई दूरी, मगर सड़क बनना भी जरूरी
विज्ञापन

बिजनौर। 50 साल से मुसीबत झेल रहे गंगा के टापू पर बसे गांव इंछावाला के लोगों के लिए पीपे के पुल ने संजीवनी देने का काम किया है। मुजफ्फरनगर होकर गांव वालों को 70 किलोमीटर की दूरी तय करके बिजनौर आना-जाना पड़ता था। पुल के बनने से बिजनौर की दूरी 25 किलोमीटर रह गई है। मगर इंछावाला तक कच्ची सड़क पर गांव वालों को आना-जाना पड़ता है। गांव से अगर ये पांच किलोमीटर लंबी सड़क पक्की हो जाए तो भारी राहत मिलेगी।
50 साल पहले गंगा के टापू पर गांव इंछावाला बसाया गया था। बरसात में गांव में पानी आ जाता था। गांव वाले शुक्रताल व अन्य स्थानों पर सामान लेकर जा बसते थे और बरसात के बाद गांव आते थे। गांव वालों ने पानी की मुसीबत से बचने के लिए बंधे की तरह टीले बना लिए थे। इससे उन्हें कुछ राहत मिली। पूरा गांव झोपड़ीनुमा बसा है। गांव में 150 परिवार हैं और कुल आबादी करीब 1500 है। यहां 350 वोट हैं। इंछावाला पंचायत में 17 मौजों में शरीफपुर, खैरपुर, आशुखेड़ी, बरामदा, लाहड़पुर, मोहनपुर, पुरुषोत्तमनगर, भगवतीपुर, सुल्तानपुर आदि शामिल हैं। गांव के लोगों को शुक्रताल होकर 70 किलोमीटर की दूरी तय करके बिजनौर आना पड़ता था। बीमारी हो या कोई और समस्या हो, उन्हें यह दूरी तय करनी होती थी। रात में बीमार होने पर शुक्रताल जाना पड़ता था। गांव डैबलगढ़ के सामने बने पीपे के पुल ने गांव वालों के लिए संजीवनी का काम किया है। 9 दिसंबर को इस पुल का उद्घाटन प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल और विधायक शुचि मौसम चौधरी ने किया था। अब इस पुल के जरिये गांव वाले 25 किलोमीटर की दूरी तय करके बिजनौर आ-जा सकते हैं। उन्हें अब मुजफ्फरनगर होकर बिजनौर नहीं आना-जाना होगा। गांव से शुक्रताल तक तीन किमी व पीपे के पुल तक पांच किमी की कच्ची सड़क है। दोनों सड़कों को पक्की बनाने की जरूरत है। बरसात के दिनों में इन सड़कों पर निकलना दूभर रहता है। सड़क अगर बन जाए तो मुसीबत कम हो जाएगी। गांव वालों ने दोनों सड़कों को पक्की कराने की मांग की है।
विज्ञापन

ग्राम प्रधान गुल शनब्बर के मुताबिक अगर गांव से शुक्रताल के पीपे के पुल तक जाने वाली सड़क पक्की हो जाए तो बहुत राहत मिलेेगी। गांव में सभी मकान कच्चे व झोपड़ीनुमा हैं। सामुदायिक शौचालय व पंचायत घर ही पक्का बनाया जा रहा है।
गांव के शकीलुद्दीन के मुताबिक सोसायटी से बीज व खाद लेने मोरना जाते हैं तो यह कहकर मना कर दिया जाता है कि वे बिजनौर के रहने वाले हैं। उन्हें कुछ नहीं मिलेगा। पुल तो बन गया, लेकिन सड़क और पक्की होनी चाहिए।
विज्ञापन

बिजली नहीं, पर गांव जगमगाता है रोशनी से
अपने पट्टों की भूमि पर रहने के कारण गांव में लोग काफी काफी दूर-दूर रहते हैं। आबादी कम है। पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने अपने कार्यकाल में इनकी परेशानी समझी थी। भारतेंद्र सिंह ने अपनी सांसद निधि से 65 सोलर लाइटें लगवाईं। गांव वालों से कहा कि इससे आपका ही लाभ है। इसलिए लाइटों की हिफाजत भी आप ही करें। उन्होंने इन लाइट पर बैटरे रखवाए। गांव वाले बताते हैं कि दस बैटरे खराब हो गए हैं, 55 के आसपास काम कर रहे हैं। पूरी रात गांव के मार्ग सोलर लाइटों से जगमगाते हैं।

मंडावर क्षेत्र के गांव इंछावाला निर्माणाधीन सामुदायिक शौचालय।- फोटो : BIJNOR

मंडावर क्षेत्र के गांव इंछावाला का निर्माणाधीन पंचायत घर।- फोटो : BIJNOR

मंडावर क्षेत्र के गांव इंछावाला में झोपड़ी के पास लगी सौर ऊर्जा प्लेट।- फोटो : BIJNOR

मंडावर क्षेत्र के गांव इंछावाला।- फोटो : BIJNOR

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें