धान की फसल पर बीमारी का खतरा
बिजनौर। मौसम की बेरूखी गन्ने के बाद अब धान पर दिखाई देने लगी है। बारिश कम होने एव तापमान ज्यादा रहने से धान की फसल भी बीमारी की चपेट में आ गई है। कृषि विभाग बीमारी व प्रभावित क्षेत्र का आंकलन करा रहा है।
जनपद में 55,345 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल है। पड़ोसी राज्यों के उपरांत बिजनौर में धान की फसल सफेद पीठवाला फुदका, तनाभेदक आदि रोग की चपेट में आने लगी है। इस बीमारी का नजीबाबाद क्षेत्र में ज्यादा असर है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने कहा कि कम बारिश व तापमान ज्यादा होने से जनपद में धान की फसल में वायरस, तनाभेदक आदि बीमारी का खतरा है। पौधे की पत्तियां गहरे हरे रंग की होती है। प्रकोपित कल्ले मुरझाने लगते है। जड़ों का विकास रुक जाता है एवं धीरे-धीरे भूरे रंग में बदल जाती है।
यह करें उपाय
अधिकारी के अनुसार प्रकोपित पौध को उखाड़कर दूर मिट्टी में गहरा दबा दें और साफ-सफाई रखें। सफेद पीठवाला फुदका नियंत्रण को बुप्रोफेजिन 25 एससी 800 एमएल अथवा एसिटामिप्रिड 20 एसपी 100 ग्राम अथवा डिनोटेफ्यूरान 20 एसजी 150-200 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
धान की फसल पर बीमारी दिखाई दे रही है। स्वयं भी लगातार धान के प्लांटों का निरीक्षण किया जा रहा है। साथ ही बीमारी व उससे नुकसान का आंकलन के लिए सभी एडीओ को निर्देशित कर दिया है।
- मनोज कुमार रावत, जिला कृषि रक्षा अधिकारी