निराश्रित गोवंश बना ग्रामीणों की मुसीबत
बिजनौर। खंड विकास अधिकारी ने निराश्रित गोवंश को पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को ऐसी गोशाला का पत्र दे दिया जो मौके पर है ही नहीं। रात भर ग्रामीण भटकते रहे और गोवंश को वापस गांव लेकर आना पड़ा। इस दौरान ग्रामीणों को वाहन के किराए के रूप में 12 हजार रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ा।
हल्दौर ब्लॉक क्षेत्र के गांव हादरपुर में ग्रामीण निराश्रित गोवंश से परेशान थे। खंड विकास अधिकारी ने गोवंश को मुरादाबाद की एक गोशाला में छोड़ आने के लिए कहा। उन्होंने गोशाला के नाम का एक पत्र तैयार कर ग्रामीणों को दे दिया। ग्रामीणों ने 12 हजार रुपये किराए में एक ट्रैक्टर ट्रॉला लेकर गोवंश उसमें लाद लिया। रात में गोवंश लेकर मुरादाबाद पहुंचे तो खंड विकास अधिकारी के द्वारा बताई गई गोशाला मौके पर मिली ही नहीं। अभी उसकी बाउंड्री का ही निर्माण चल रहा है। रात में ही ग्रामीणों ने मुरादाबाद के प्रशासन से बात की, उन्होंने दूसरे जिले के गोवंश लेने से इनकार कर दिया। रातभर भटकने के बाद ग्रामीण गोवंश लेकर गांव लौट आए। गांव वालों के अनुसार ब्लॉक के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने इसे अपनी गलती बताया। फिलहाल गांव में 16 से 17 गोवंश खड़े हुए हैं।
12 हजार किराया खर्च हुआ, अब चारे की भी कर रहे व्यवस्था
हादरपुर की ग्राम प्रधान के पति वीरेंद्र कुमार ने बताया कि ब्लॉक से पत्र बनवाने के बाद मुरादाबाद की गोशाला के लिए गोवंश ले गए थे। गोवंश ले जाने में 12 हजार का खर्चा आया। रात भर परेशान रहे। जिस गोशाला के लिए पत्र लिखा गया था, वह अभी बनी भी नहीं है। बाद में गोवंश को गांव में ही लाना पड़ा। अब अपनी जमीन में सभी गोवंश बांध रखे हैं। उनके चारे के लिए गांव वालों से सहयोग लेना पड़ रहा है। एक गोवंश बीमार भी हो गया है। वीरेंद्र कुमार, प्रधानपति
अफजलगढ़ के अगवानपुर की जगह गलती से मुरादाबाद के अगवानपुर वाली गोशाला भेजने का पत्र बन गया था, जिसे एडीओ ने बनाया। ग्राम प्रधान को गोवंश ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी। अब गोवंश को अफजलगढ़ के अगवानपुर गोशाला भेजा जाएगा। फिलहाल गांव में ही गोवंश के संरक्षण की जिम्मेदारी प्रधान को दी गई है। सभी पंचायतों में छोटी-छोटी गोशाला बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं - वीरेंद्र कुमार यादव, बीडीओ हल्दौर