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खेतों में घूम रहे बेसहारा गोवंश की होगी गणना

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ग्रामीणों द्वारा एक स्कूल में बंद किए गए निराश्रित गोवंश। - फोटो : BIJNOR
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खेतों में घूम रहे बेसहारा गोवंश की होगी गणना
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बिजनौर। खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे बेसहारा गोवंश से किसानों को जल्द निजात मिलेगी। पशुपालन विभाग खेतों में घूम रहे बेसहारा पशुओं की गणना कराएगा। गोवंश की गणना के आधार पर ही चार पंचायतों की परिधि में एक गोशाला बनाई जाएगी। गोवंश की संख्या को देखते हुए गोशला बनाने के लिए गांवों की संख्या घटाई या बढ़ाई जा सकती है। खेतों से बेसहारा गोवंश को पकड़कर इन गोशालाओं रखा जाएगा।
जनपद में बेसहारा गोवंश की समस्या बढ़ रही है, इसे दूर करने के लिए जनपद में 12 कान्हा आश्रयस्थल, तीन वृहद गोशाला तथा दस ब्लॉक स्तर पर गोशाला बना रखी हैं। एक अस्थायी गोशला का भी निर्माण कराया गया है। इन सभी गोशालाओं में करीब दो हजार 28 गोवंश हैं। इसके बाद भी जंगल में घूम रहे बेसहारा गोवंश की संख्या में इजाफा हो रहा है। आए दिन किसान संगठन बेसहारा गोवंश से फसल को बचाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते रहते हैं। इससे निजात दिलाने के लिए प्रशासन व पशुपालन विभाग ठोस कदम उठा रहा है। पशुपालन विभाग पहले खेतों में घूम रहे बेसहारा गोवंश की गणना कराएगा। उसके बाद उनकी संख्या के आधार पर गोशाला बनाकर उन्हें पकड़कर उनमें रखा जाएगा।
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जिले में बनेंगी करीब 280 गोशालाएं
जनपद में 1123 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें चार पंचायतों के बीच में एक गोशाला बनाई जाएगी। उस क्षेत्र के सभी बेसहारा गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में रखा जाएगा। पशुपालन विभाग खेतों में घूम रही बेसहारा गोवंश को पकड़वाकर गोशालाओं में आसरा दिलाएगा। अफसरों के अनुसार पंचायतों में बनने वाली गोशालाओं के गोवंश के खाने के लिए उस क्षेत्र की चरागाह की जमीन में चारे की बुवाई की जाएगी। इसके लिए प्रशासन सभी गांवों में चरागाह की जमीन को खाली कराएगा। साथ ही शासन से प्रत्येक गोवंश के चारे के लिए मिलने वाली धनराशि के साथ पंचायत स्तर से खर्च किया जाएगा। प्रशासन की ओर से राजस्व टीम व ब्लॉक अधिकारियों को चारागाह जमीन कब्जा मुक्त कराने को निर्देशित कर दिया गया है।
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खेतों में घूम रहे बेसहारा गोवंश की गणना के लिए निर्देश जारी कर दिए गए है। इनकी गणना के आधार पर आई संख्या के अनुसार ही गांवों की परिधि में एक गोशाला बनाई जाएगी। गणना में आई गोवंश संख्या के आधार पर गोशालाएं बनाई जाएंगी। चार से पांच गांवों के बीच में तथा संख्या कम होने पर ज्यादा गांवों की परिधि में एक गोशाला बनाई जाएगी - डॉ. विजेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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