शामली। जनपद के किसान संगठनों ने बिजली विभाग के निजीकरण का फैसला वापस लेने व बिजली की समस्याओं के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। कलक्ट्रेट पर पहुंचकर ज्ञापन दिया।
बुधवार को जनपद के विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बिजली विभाग के निजीकरण के फैसले को वापस लेने व बिजली संबंधित समस्याओं के समाधान की मांग की। उन्होंने कहा कि 25 नवम्बर 2024 को पावर कारपोरेशन ने वित्तीय समीक्षा बैठक में बिजली विभाग के दक्षिणांचल व पूर्वांचल वितरण निगमों के निजीकरण का फैसला लिया था और राज्य सरकार भी कार्पोरेशन के इस निर्णय पर अपनी सहमति दिखाती नजर आ रही है। बिजली विभाग के निजीकरण का प्रयास राज्य सरकार 2022 के अंत में भी कर चुकी है इसलिए संदेह और ज्यादा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि किसान संगठन बिजली के निजीकरण का विरोध लगातार कर रहे हैं।
कहा कि ग्रामीण उपभोक्ताओं को हर महीना 300 यूनिट बिजली निशुल्क देने, नलकूपों को निशुल्क बिजली देने, स्मार्ट मीटर योजना रद्द करने, किसानों के ट्यूबवैलों को 18 घंटे बिना शर्त बिजली आपूर्ति दी जाए, कनेक्शन चार्ज, लाइन, ट्रांसफार्मर, बिलिंग मीटर, कनेक्शन काटने व जोड़ने आदि उपभोक्ताओं से वसूलना बंद करने, निजी कंपनियों से महंगी बिजली न खरीदी जाए आदि की मांग की।
इस अवसर पर संजीव कुमार, अंकित, अंकुश, अंबुज मलिक, मनोज, गौतम, सुबोध, वीरसैन पंवार, विजित पंवार, बिजेंद्र सिंह, सिद्धार्थ पंवार, हरेंद्र सिंह आदि भी मौजूद रहे।