गुड़ का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य मांग रहे कोल्हू संचालक
बिजनौर। गुरु तो गुड़ ही रहे, चेले शक्कर हो गए। कभी ये कहावत चीनी की बढ़ी कीमतों के लिए या किसी की महत्ता दर्शाने के लिए कही जाती है। लेकिन आज चीनी और गुड़ दोनों के ही बाजार पिटते जा रहे हैं। चीनी का बाजार थोड़ा इसलिए संभला हुआ है, क्योंकि सरकार ने चीनी के न्यूनतम मूल्य निर्धारित कर रखे हैं। लेकिन गुड़ का बाजार उत्पादन कम होने के बाद भी लगातार नीचे गिर रहा है। कोल्हू व क्रेशर चलाने वाले भी अब चीनी कर तरह गुड़ का भी न्यूनतम मूल्य तय करने की मांग कर रहे हैं।
जिले में गन्ना प्रमुख फसल है। गन्ना है तो चीनी मिलों के साथ कोल्हू व क्रेशर भी बड़ी संख्या में चल रहे हैं। जिले में करीब 115 क्रेशर व एक हजार कोल्हू गन्ने की पेराई कर रहे हैं। सीजन की शुरूआत में गुड़ के दाम 3400 रुपये व गन्ने के दाम 240 रुपये प्रति क्विंटल थे। इस बार कोल्हू व क्रेशर ज्यादा चले तो किसानों का गन्ना खरीदने के लिए इनके मालिकों में प्रतिस्पर्धा रही। नतीजा यह रहा कि गन्ना खरीद में मुकाबला होने पर गन्ने के दाम बढ़ते चले गए और उत्पादन अधिक होने से गुड़ के दाम गिरते चले गए।
जिले में वर्तमान समय में करीब 25 प्रतिशत क्रेशर व 30 प्रतिशत कोल्हू बंद चल रहे हैं। काफी समय से यही हालत है। लेकिन इसके बाद भी गुड़ के दामों में सुधार नहीं हो रहा है। गुड़ के दाम पिछले सप्ताह 2770 रुपये प्रति क्विंटल थे। कोल्हू, क्रेशर बंद होने से गुड़ के दाम बढ़ने की आस थी, लेकिन उत्पादन कम होने के बाद भी गुड़ के दाम अब 2625 से 2650 रुपये प्रति क्विंटल तक ही रह गए हैं। गुड़ के दाम लगातार गिर रहे हैं। इससे कोल्हू व क्रेशर चलाने वालों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
3100 रुपये है चीनी का न्यूनतम मूल्य
चीनी के न्यूनतम दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं। इससे कम पर कोई चीनी नहीं खरीद सकता है। लेकिन गुड़ के मामले में ऐसा नहीं है। चीनी के दाम अधिक हों तो भी किसान को चीनी मिल गन्ने का एमएसपी का मूल्य ही देते हैं। लेकिन गुड़ के दाम अधिक होने पर किसान का गन्ना भी महंगा खरीदा जाता है। गुड़ के दाम अधिक होने से किसानों को सीधा फायदा होता है।
वर्तमान दौर बुरे सपने जैसा
क्रेशर संचालक हरपाल सिंह का कहना है कि गन्ना न मिलने से उनका क्रेशर बृहस्पतिवार को दस दिन बाद चला है। गन्ने का रेट 270 है, लेकिन गुड़ के दाम बहुत गिर रहे हैं। पिछले साल कोल्हू, क्रेशर वालों के लिए बहुत अच्छा था, लेकिन वर्तमान पेराई सत्र बुरे सपने जैसा है। सरकार को गुड़ का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी तय करना चाहिए।
गुड़ के मामले में दखल दे सरकार
क्रेशर मालिक रामदर्शन अग्रवाल के अनुसार गुड़ का कारोबार सीधे किसानों से जुड़ा है, लेकिन इस बार बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस व्यापार से किसान के साथ मजदूर भी जुड़े हैं। सरकार को इस मामले में दखल देना चाहिए। क्योंकि यदि गुड़ के दाम अधिक होंगे तो किसानों का गन्ना भी महंगे दाम पर खरीदा जाएगा।