बिजनौर में छात्र वासु को अगवा करके उसके फुफेरे भाई ने ही अपने दो साथियों के साथ मिलकर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्यारोपी ने वासु के पिता से दस लाख रुपये की फिरौती भी मांगी थी। वारदात की वजह वासु की दादी के नाम करोड़ों की कीमत की छह बीघा जमीन है। इस जमीन को वासु की बुआ हथियाना चाहती थी। इस बात पर वासु के पिता का अपनी बहन से चार माह पूर्व विवाद भी हुआ था। पुलिस ने तीनों हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर वासु का शव बरामद कर लिया है।
एसपी उमेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव रामपुर बकली निवासी सुनील कुमार के बेटे वासु (12) का एएन इंटरनेशनल स्कूल से 14 जुलाई को घर लौटते समय अपहरण कर लिया गया था। पुलिस टीम ने वासु के फुफेरे भाई मंडावर थाने के गांव मोहंडिया निवासी राजकुमार पुत्र वीरेश, उसके साथी गांव के ही राहुल पाल पुत्र सुरेश और लोकेश पुत्र नरेश को गिरफ्तार कर पूछताछ की। उन्होंने वासु के अपहरण से लेकर हत्या तक का सारा राज उगल दिया। पुलिस ने तीनों की निशानदेही पर शनिवार की शाम गांव बांकपुर के जंगल से जमीन में दबा वासु का शव, बस्ता व टाई बरामद कर ली। राजकुमार ने पुलिस को बताया है कि वासु की दादी यानि उसकी नानी के नाम करोड़ों की छह बीघा जमीन है। यह जमीन उसकी मां गीता अपने नाम कराना चाहती थी। गीता चार माह पूर्व अपनी मां को अपने घर ले गई थी। वहां मामा सुनील भी पहुंच गया। जमीन को लेकर मां गीता व मामा में खूब तकरार हुई थी। मामा सुनील ने उसकी मां को काफी जलील किया था, तभी से वह मामा से बदला लेना चाहता था। कुछ दिन पहले मां गीता मामा सुनील के घर आई थी। अचानक राजकुमार भी वहां पहुंच गया, तब भी मां और मामा में विवाद हो गया था। इसके बाद उसने वासु के अपहरण की साजिश रची। हत्यारोपी ने पुलिस को बताया कि वासु का अगवा करने वाले दिन ही उसकी हत्या करके शव को गड्ढे में दबा दिया था।
खून का रिश्ता कलंकित कर डाला
पुलिस ने करीब 45 दिन बाद तीन हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर अगवा छात्र वासु का शव बरामद कर पूरे मामले का खुलासा कर दिया। वासु की हत्या से एक बार फिर खून का रिश्ता कलंकित हो गया। अपमान का बदला लेने के लिए वारदात को अंजाम दिया गया।
शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव रामपुर बकली निवासी सुनील कुमार के 12 साल के पुत्र वासु का 14 जुलाई को स्कूल से घर लौटते समय अगवा कर लिया गया था। पुलिस ने इस मामले में ई रिक्शा चालक महबूब को हिरासत में लिया था। वासु का पता लगाने के लिए पुलिस का हर प्लान फेल हो रहा था। पुलिस के साथ एसटीएफ बरेली को भी इस केस के खुलासे के लिए लगाया गया था। क्राइम ब्रांच बिजनौर की टीम इस केस को खोलने में कामयाब रही। पकड़े गए तीनों हत्यारोपियों ने पुलिस को बताया कि राजकुमार और लोकेश कार में सवार होकर एएन इंटरनेशल स्कूल पहुुंचे। राहुल पाल बाइक लिए मौजूद था। वासु क्लास से बाहर आया, तो राजकुमार ने राहुल को वासु को दिखा दिया। वासु की ओरअपना हाथ हिलाया। वासु ने भी हाथ हिला दिया। स्कूल से ई रिक्शा के साथ कार व बाइक से तीनों चलते रहे। रास्ते में राजकुमार ने वासु की ओर इशारा करके उसे राहुल की बाइक पर बैठने को कहा। वासु ई रिक्शा रुकवाकर राहुल की बाइक पर बैठ गया। चक्कर रोड पर रेलवे क्रॉसिंग के पास राहुल की बाइक रुकवाकर वासु को राजकुमार ने अपनी कार में बैठा लिया। वासु को लेकर तीनों बाइक व कार से गांव बांकपुर के जंगल में ले गए। गन्ने के खेत में ले जाकर वासु की उसी की टाई से गला घोंटकर हत्या कर दी और उसका शव गन्ने के खेत में दबा दिया।
अगवा करने के दो दिन बाद 16 जुलाई को राहुल व गांव का ही सोनू लक्सर पहुंचे व पीछे से वासु के पिता से दस लाख की फिरौती मांगी। सोनू अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। राजकुमार ने पुलिस को बताया कि वासु की दादी यानी उसकी नानी के नाम करोड़ों की छह बीघा जमीन है। यह जमीन उसकी मां गीता अपने नाम कराना चाहती थी। इस मामले को लेकर कई बार विवाद हुआ था। उसकी मां का वासु के पिता सुनील कुमार ने कई बार अपमान किया। इस अपमान का बदला लेने के लिए ही वासु की हत्या कर दी।
दो दिन बाद गड्ढा खोदकर दबाया था शव
वासु का कत्ल करने के बाद राजकुमार अपने दोनों साथियों के साथ शव को गन्ने के खेत में बिना दबाए छोड़ आया था। कत्ल करने के बाद लौटते समय जंगल में उसकी कार फंस गई थी। जंगल में काम कर रहे मजदूरों को बुलाकर उसने अपनी कार निकलवाई थी। राजकुमार ने पुलिस को बताया कि उसे डर था कि जंगल में वासु का शव कोई देख न ले। दो दिन बाद वह लोकेश व राहुल को रात में लेकर अपने साथ बांकपुर के जंगल में गया। फावड़ा अपने साथ ले गए थे। खेत में जाकर गड्ढा खोदकर वासु का शव दबा दिया था।
कत्ल करके वासु के घर गया था राजकुमार
वासु का कत्ल करने के बाद राजकुमार अपने मामा सुनील के घर आ गया था। रात में मामा के घर उसने खाना खाया और वहीं सोया। रात भर वासु को ढूंढवाता रहा। राजकुमार ने अपने ऊपर कतई शक नहीं जाने दिया। इसके बाद भी राजकुमार वहां आता जाता रहा।
रिहा होगा रिक्शा चालक महबूब
वासु के अपहरण के षड्यंत्र में जेल भेजे गए रिक्शा चालक को पुलिस जेल से रिहा कराएगी। एसपी के मुताबिक 169 की रिपोर्ट देकर महबूब को जेल से रिहा कराया जाएगा। वहीं वासु के परिजन महबूब के साथ वासु के ताऊ नरेंद्र का चालान कराने पर अड़े थे। हालांकि पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। यह तक कहा जा रहा था कि नरेंद्र का नार्को टेस्ट कराया जाए।
हत्यारोपियों के बीच गहरी दोस्ती
बिजनौर(ब्यूरो)। अगवा छात्र वासु का अपहरण के बाद कत्ल करने वाले सभी आपस में गहरे दोस्त हैं। वासु हत्याकांड के आरोपी राजकुमार, लोकेश, राहुल और सोनू की दोस्ती गांव में किसी से छिपी नहीं है। इन सब दोस्तों की आपस में कोई बात किसी से छिपी नहीं है। हर काम ये एक दूसरे से मालूम करके ही करते हैं।
वासु का कत्ल करने के लिए सब दोस्तों ने एक साथ मिलकर साजिश रची थी। अपहरण व मर्डर में सोनू को शामिल नहीं किया गया था। राजकुमार ने दोस्तों को लालच दिया था। फिरौती में मिलने वाली दस लाख की रकम को वह आपस में बांट लेंगे। लोकेश व राहुल राजकुमार की बातों में आ गए और उसके साथ वासु के अपहरण करने का साजिश रच लिया। राजकुमार घटना के दिन दोनों साथियों को लेकर वासु के स्कूल पर पहुंच गया। पुलिस के मुताबिक कातिलों ने शुरू में फिरौती लेने का प्लान बनाया था। हालांकि अपहरण के बाद आरोपियों ने सोचा कि वे वासु को कहां रखेंगे। अपहरण करने के तुरंत बाद वासु को बांकपुर के जंगल में ले जाकर मार डाला। तीनों ने अपने साथ गांव के अपने चौथे साथी सोनू को भी जोड़ लिया। सोनू को साथ ले जाकर फिरौती की रकम मांगी। सोनू को भी फिरौती की रकम का हिस्सा देने का वादा किया। एसपी उमेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक वासु का अपहरण कर हत्या केवल फिरौती के लिए किया गया था।
क्राइम ब्रांच टीम को मिली कामयाबी
वासु को बरामद करने के लिए पुलिस की आठ टीमें लगी थी। वासु को बरामद करने का सेहरा क्राइम ब्रांच की टीम के सिर पर बंध गया है। यह टीम वासु के कातिलों तक पहुंच पाई। पुलिस की आठ टीमों के साथ एसटीएफ बरेली भी वासु को बरामद करने में लगी थी। क्राइम ब्रांच की टीम ने राजकुमार को दबोचकर कड़ाई से पूछताछ की तो वह सबकुछ उगलता चला गया। वासु के अपहरण से लेकर मर्डर तक की सारी परतें खुलती चली गईं। पुलिस ने इसके बाद उसके दोनों साथी राहुल व लोकेश को भी दबोच लिया। क्राइम ब्रांच की टीम में शामिल दरोगा नरेश त्यागी, सुमन कुमार, फतेह सिंह, प्रदीप धनकड़, आदित्य, केपी सिंह इस केस के खुलासे में जुट गए। एसपी के मुताबिक एसपी सिटी एमएम बेग व सीओ नजीबाबाद रामानंद कुशवाहा ने केस को खोलने में पूरी पड़ताल की। एसपी ने टीम को दस हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। डीजीपी से टीम को सम्मानित कराने की भी बात कही है।
राहुल की लोकेशन ने पहुंचाया कातिलों तक
पुलिस राजकुमार को वासु अपहरण के बाद पहले भी उठाकर पूछताछ कर चुकी थी लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंची थी। क्राइम ब्रांच की टीम पहले से ही राजकुमार पर शक कर रही थी। राहुल के साथ जब सोनू लक्सर फिरौती के लिए फोन करने गया, तो पीसीओ के आसपास राहुल की लोकेशन मिली थी। राजकुमार व राहुल एक ही गांव के होने के कारण पुलिस का शक राजकुमार पर भी जाने लगा। पुलिस राजकुमार की गतिविधियों पर नजर रखने लगी थी। राजकुमार को उठाते ही परिजन पुलिस पर उसे छोड़ने के लिए दबाव डालने लगे थे। कहा जा रहा था कि राजकुमार का इस केस से कोई लेना देना नहीं है। पुलिस ने वासु के परिजनों का विश्वास नहीं किया और कहा किसी भी परिजन को परेशान नहीं किया जाएगा। केवल पूछताछ के लिए राजकुमार को बुलाया गया, तब जाकर वासु के परिजन शांत हुए।