बिजनौर जिले के नूरपुर में जालसाजी कर चुनाव जीतने के आरोप में अदालत के आदेश पर पुलिस ने ग्राम प्रधान और दो लेखपालों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
रहटी जागीर निवासी कल्याण सिंह ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि शीतल मलिक पुत्री रमेश कुमार पिछड़ा वर्ग से संबंध रखती हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में शीतल मलिक ने बिलारी तहसील के हलका लेखपाल से हमसाज होकर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवा लिया। शीतल मलिक ने प्रमाणपत्र में स्वयं को रामनगर गंगपुर तहसील बिलारी जनपद मुरादाबाद का निवासी दर्शाया है, जबकि इस पते पर इस नाम की कोई महिला नहीं रहती। इस फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे ही शीतल मलिक ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2015 में प्रधान पद के लिए नामांकन कराया और चुनाव भी जीत गईं।
इतना ही नही शीतल मलिक ने लिविंग सर्टिफिकेट में भी अपनी जन्मतिथि तीन अप्रैल 1995 दर्शायी है। इस तिथि के आधार पर वह चुनाव लड़ने के लिए 21 वर्ष की आयु भी पूर्ण नहीं करती हैं। कल्याण सिंह के अनुसार मामले की शिकायत एसपी बिजनौर से भी की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। न्यायालय ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच करने के आदेश दिए। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर ग्राम प्रधान शीतल मलिक व बिलारी तहसील और चांदपुर तहसील के लेखपाल के विरुद्ध धोखाधड़ी करने सहित विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह ने रिपोर्ट दर्ज होने की पुष्टि की है।