बिजनौर में एनएचएम में वर्ष 2016 के जून व जुलाई में तीन करोड़ दस लाख रुपये का घोटाला हुआ था। घोटाले में जांच करने आई टीम ने सीएमओ डॉ.सुखवीर सिंह को ही तत्कालीन सीएमओ बनाकर प्रथम दृष्टया में दोषी माना है। निदेशक स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक लखनऊ को वर्तमान सीएमओ की जांच भी सौंपी गई है। इस कार्य से जांच टीम स्वयं जांच के घेरे में आ गई है।
एनएचएम में जून व जुलाई 2016 में तीन करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। इस मामले में एनएचएम ने बिना सामान खरीदे ही गैर जनपद की चार कंपनियों को भुगतान किया था। यह भुगतान जून व जुलाई में दस बार में किया गया था। इसका अंतिम भुगतान 26 जुलाई को किया गया था। अगस्त में यह घोटाले सामने आया था। घोटाले में तत्कालीन एसीएमओ एनएचएम डॉ.पीआर नायर ने रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। पुलिस द्वारा घोटाले की जांच के बाद दो कर्मचारियों को जेल भी भेजा गया है।
जिन कंपनियों को यह भुगतान किया गया था, पुलिस ने उन कंपनियों की जांच कर उनको अस्तित्व में ही नहीं पाया था। सितंबर में लखनऊ की टीम ने बिजनौर आकर जांच शुरू की थी। टीम ने जांच में वर्तमान सीएमओ डॉ.सुखवीर सिंह को ही तत्कालीन सीएमओ बनाकर प्रथम दृष्टया दोषी मान लिया है और सीएमओ पर लापरवाही, उदासीनता का आरोप लगाया है। टीम का मानना है कि सीएमओ ने अपने कार्यों का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया है। इस घोटाले में 26 जुलाई को अंतिम भुगतान किया गया था जबकि सीएमओ डॉ.सुखवीर सिंह ने 27 जुलाई 2016 की दोपहर में चार्ज संभाला था। इस कार्य से जांच टीम स्वयं जांच के घेरे में आ गई है। सीएमओ डॉ.सुखवीर सिंह ने बताया कि उनको अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार द्वारा भेजा गया पत्र मिला है। इसमें उनको तत्कालीन सीएमओ दर्शाते हुए दोषी माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने घोटाले की अगली तिथि 27 जुलाई 2016 में बिजनौर चार्ज संभाला था।