बिजनौर में देवबंद थाने में फर्जी नियुक्ति का मामला छह माह से अधर में लटका था। इस मामले में देवबंद की पुलिस ने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
देवबंद क्षेत्र के रवि कुमार की ओर से थाने में इस मामले में शिकायत की गई थी। कहा गया था कि सींचपाल की नौकरी दिलाने के नाम पर 19 लोगों से चार से छह लाख रुपये तक वसूले गए हैं। सूत्रों के मुताबिक देवबंद पुलिस चुपचाप आती थी और मुकदमे में फंसाने के नाम पर वसूली करके ले जाती थी। पुलिस का यह खेल खूब चलता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक देवबंद पुलिस ने बृहस्पतिवार को जलीलपुर व किरतपुर ब्लॉक में जब छापा मारा, तब तक देवबंद थाने में इस मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं थी। छापामारी की गूंज लखनऊ होने के बाद देवबंद पुलिस ने आनन फानन में इस मामले की रिपोर्ट दर्ज की। देवबंद पुलिस अब अपना पीछा छुड़ाने का रास्ता तलाश रही है।
दो टीमों ने मारा था छापा ःसहारनपुर जिले की देवबंद पुलिस की दो टीमों ने एक साथ जलीलपुर और किरतपुर ब्लॉक में छापा मारा। जलीलपुर ब्लॉक में अपराह्न करीब तीन बजे टीम ने बैठक होने के बाद छापा मारा। इस दौरान बीडीओ सुधा पाठक भोजन कर रही थीं। आते ही पुलिस ने उन्हें दबोच लिया और जांच की बात कहकर अपने साथ ले गए। आरोप है कि रास्ते में पुलिस टीम उन्हें सबक सिखाने की धमकी देती रही। सुधा पाठक का मोबाइल भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया और अफसरों से उन्हें बात नहीं करने दी। तहसील पहुंचने पर जब देखा कि बीडीओ का नाम जांच में नहीं है, तब उन्हें छोड़ा गया। सीओ की अगुवाई में छापा मारा गया। किरतपुर में इंस्पेक्टर की अगुवाई में छापा मारा गया।
टीम ने बीडीओ शैलेंद्र व्यास को मोबाइल भी नहीं उठाने दिया। जबरन हाथ पकड़कर ले गए। बीडीओ ने जब बताया कि वे आठ दिन पहले ही आए हैं, तो उन्हें जंगल में किसी को कुछ न बताने की धमकी देकर छोड़ा गया।