अलीगढ़ में एएमयू के डीएसडब्ल्यू छात्र आलमगीर से लेकर एनआईए अफसर तंजील अहमद हत्याकांड जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाला कुख्यात शूटर मुनीर अब पेशेवरों की तरह पेश आने लगा है।
यही वजह रही कि बृहस्पतिवार को बारह घंटे की रिमांड पर आए मुनीर से पूछताछ के बाद भी पुलिस उसके द्वारा बताए गए ठिकानों बरला के नौशा से मजिस्ट्रेट के गनर से लूटी गई पिस्टल बरामद नहीं कर पाई। गनर की हत्या में प्रयुक्त अपाचे बाइक भी एएमयू के सुलेमान हॉल के कमरा नंबर दो में नहीं मिली। फिलहाल पुलिस ने उसे शाम को जिला न्यायालय में दाखिल कर दिया। मगर उससे पूछताछ में दो नाम सामने आए हैं। संदेह है कि उनकी मदद से पिस्टल बरामद हो सकती है। अब पुलिस उन्हें भी रडार पर लिए हुए है। सिविल लाइंस के पान दरीबा में वर्ष 2014 में हुई जीआरपी सिपाही सुरेश चंद्र की दिनदहाड़े हत्या व सर्विस पिस्टल लूट में मुनीर का नाम सामने आया था। गिरफ्तारी के बाद उसने सुरेश की हत्या व पिस्टल लूट स्वीकारते हुए कहा था कि उसने यह पिस्टल अपने दोस्त जुबैर के भाई सद्दाम को रखने के लिए दी थी। जब उसने पिस्टल नहीं लौटाई तो जुबैर के सामने ही उसने सद्दाम की हत्या कर दी। उसने कहा था कि यह पिस्टल सद्दाम के घर या परिवार के किसी सदस्य पर ही होगी। इसी आधार पर इस मुकदमे की विवेचना कर रही क्राइम ब्रांच ने पिस्टल व हत्या में प्रयुक्त बाइक बरामद करने के लिए रिमांड मांगा था। अदालत से बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक का रिमांड मिला। पुलिस व स्वॉट टीम ने उसे जेल से रिमांड पर लिया ।
और पहले पुलिस लाइन लेकर आई। यहां कुछ देर रुकने के बाद उसे सद्दाम के गांव नौशा बरला ले जाया गया। जहां सद्दाम के मां-बाप तो नहीं मिले। मगर बहन थी। घर की तलाशी ली गई। मगर पिस्टल नहीं मिली। इस दौरान सद्दाम के एक चचेरे भाई इरफान का जिक्र आया। वह गायब था। पुलिस ने उसका घर भी तलाशा, मगर वहां भी कुछ नहीं मिला।