केमिकल फैक्ट्री में मीथेन गैस के फटे टैंक को देखती भीड़। (फाइल फोटो)
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बिजनौर। जिलाधिकारी अटल कुमार राय के आदेश पर मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री के मीथेन गैस के टैंक में विस्फोट के बाद सात लोगों की मौत के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू हो गई है। इस मामले की जांच जिलाधिकारी ने अपर जिला मजिस्ट्रेट (न्यायिक) को सौंपी है। इस मामले से प्रभावित लोग अपर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में उपस्थित होकर पांच अक्तूबर तक साक्ष्य दे सकते हैं। हैरत की बात यह है कि जांच के आदेश कब जारी हुए? यह किसी को नहीं मालूम। मजिस्ट्रेटी जांच शुरू होने से फैक्ट्री प्रबंधन व मालिकों में हड़कंप मचा हुआ है।
नगीना मार्ग स्थित मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में 12 सितंबर को मीथेन गैस के टैंक में वेल्डिंग के दौरान विस्फोट हो गया था। इस हादसे में टैंक पर चढ़कर वेल्डिंग कर रहे सात मजदूरों की मौत हो गई थी और चार घायल हुए थे। क्षेत्रवासियों और मृतकों के परिजनों ने मजदूरों की मौत का जिम्मेदार फैक्ट्री स्वामी और कई विभागों को ठहराया था। कार्रवाई की मांग को लेकर जमकर हंगामा हुआ था। इस मामले में फैक्ट्री स्वामी कुलदीप जैन, मुख्य प्रबंधक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने मुख्य प्रबंधक सुरेश पंवार को दबोच लिया था पर फैक्ट्री स्वामी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। फैक्ट्री स्वामी की ओर से मृतकों के परिजनों को 12-12 लाख रुपये के चेक दिए गए थे। रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला माया से शपथ पत्र लेने के बाद उसे चेक दिया गया था। शपथ पत्र में माया देवी से लिखवाया गया था कि हादसे वाले दिन उसके पति को फैक्ट्री में जल्दी नहीं बुलाया गया था, जो रिपोर्ट दर्ज कराई है, उसे भी वापस लेने की बात कही गई थी। इसके बाद प्रशासन ने फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। प्रशासन ने इस मामले में कोई जांच शुरू नहीं कराई थी। लोगों के कहने के बाद भी मजिस्ट्रेटी जांच शुरू नहीं हुई थी। घटना के बाद फैक्ट्री को सील किया गया था। मगर, बाद में पता चला कि फैक्ट्री को सील न करके पुलिस जांच के लिए केवल फ्रिज किया गया था।
अब डीएम अटल कुमार राय के आदेश पर फैक्ट्री की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू करा दी गई है। अपर जिला मजिस्ट्रेट न्यायिक डा. नितिन मदान के अनुसार हादसे के संबंध में किसी व्यक्ति को लिखित या मौखिक साक्ष्य देना है तो उनके कार्यालय में पांच अक्तूबर तक उपस्थित होकर दे सकता है। इसके बाद कोई साक्ष्य नहीं लिया जाएगा। हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच का पता चलते ही लोग हक्का बक्का रह गए हैं। किसी को नहीं मालूम कि जांच के आदेश कब हुए हैं। आला अफसर शुरू से ही फैक्ट्री के हादसे की जांच कराने से हाथ खड़े कर रहे थे। कहा जा रहा था कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस विवेचना कर रही है। कारखाना इंस्पेक्टर इसकी जांच कर रहे हैं। बाद में लखनऊ से आए कारखाना निदेशक ने भी अफसरों के साथ फैक्ट्री पहुंचकर जांच की थी। माना जा रहा है कि कारखाना निदेशक की रिपोर्ट शासन को देने के बाद ही इस हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच शुरू हुई है।