बिजनौर। पुलिस ने एनआईए अफसर तंजील अहमद हत्याकांड का खुलासा करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। हत्याकांड के खुलासे से पहले पुलिस ने पूरा होमवर्क भी नहीं किया। तंजील हत्याकांड का मुख्य आरोपी मुनीर भी पुलिस गिरफ्त में नहीं आ सका। ऐसे में हाईप्रोफाइल हत्याकांड पर सवाल उठना लाजिमी है। मर्डर में न तो मुख्य आरोपी मुनीर को दबोचा और न ही आलाकत्ल की कोई बरामदगी की।
डीजीपी जावीद अहमद ने बिजनौर आगमन के दौरान दावा किया था कि पुख्ता सबूत के साथ ही वारदात का खुलासा किया जाएगा। उनका दावा भी हवा हवाई ही रह गया।
कई दिन की माथापच्ची के बाद मंगलवार को पुलिस ने तंजील अहमद के मर्डर का खुलासा कर दिया। आधी अधूरी कहानी और मुख्य आरोपी हिस्ट्रीशीटर मुनीर के बिना पक़डे़ वारदात का पुलिस ने खुलासा करने दावा कर दिया। मर्डर में इस्तेमाल की बाइक और पिस्टल, रिवाल्वर भी बरामद नहीं किया जा सका है। मर्डर की मुख्य वजह क्या रही इसके पीछे और क्या राज है ? इसके भी पुलिस ने पुख्ता सबूत नहीं जुटाए और मर्डर का खुलासा कर दिया।
मर्डर का खुलासा पुलिस के सामने तमाम तरह के सवाल खड़े कर रहा है। डीआईजी विजय सिंह मीणा के मुताबिक मुनीर के पकड़े जाने के बाद अभी मर्डर की और बात सामने आएगी। मर्डर में रैय्यान व जैनी जो बात बताई है, उन्हें तसदीक करने के बाद ये केस खोला गया हैं। तंजील अहमद मर्डर की अभी विवेचना बंद नहीं हुई है। विवेचना खुली है। मर्डर की ओर कोई कहानी सामने आती है तो उसे विवेचना में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुनीर को पकड़ने के लिए पुलिस ने जाल बिछा रखा है। पुलिस घटना की सच्चाई से पर्दा उठाने में लगी है।
कोर्ट में कराए बयान
डीआईजी ने बताया कि मुनीर से सहसपुर में मिलने वाले उसके फुफरे भाई बॉबी उर्फ फजल अहमद वइनामुलहक के कोई में 164 के बयान करा दिए गए हैं।
पासपोर्ट भी बना है मुनीर का
डीआईजी के मुताबिक मुनीर को वर्ष2011 से पासपोर्ट बना है । इस पासपोर्ट पर पुलिस की स्योहारा थाने की रिपोर्ट लगी है। जांच कराकर देख लिया गया है कि जब पासपोर्ट बना तब मुनीर का अपराधिक रिकार्ड नही था। वर्ष 2013 में उसने अपराध की दुनिया में कदम रखना शुरू किया। इतना जरूर है बिजनौर से बने पासपोर्ट के बारे में अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
बता दिया गया है। इस पासपोर्ट से वह विदेश नही भाग सकता है। इा पासपोर्ट से पहले कभी मुनीर विदेश गश क्या इसका भी पता कराया जा रहा है।
नही मिली मौजूदा महबूबा
डीआईजी ने बताश कि मुनीर की मौजूदा किसी महबूबा के बारे में पता नही चला है । अलीगढ़ में उसकी एक महबूबा मिली है जो डेढ साल से उसके संर्पक में नही है । अलीगढ़ की महबूबा की शादी हो गई है।
तंजील की हरकतों से परेशान था मुनीर
डीआईजी ने बतायां कि मुनीर का उसके गांव के दोस्त तंजीम व रिजवान ने बताया था कि तंजील की शिकायत पर ही पुलिस मुनीर के पीछे पडी़ है। मुनीर इस बात से बेहद परेशान था। रिजवान , तंजीम व मुनीर की राय थी कि तंजील के रहते इज्जत से जेल से बाहर रहना बड़ा मुश्किल हो गया है। तभी मुनीर ने तंजील को ठिकाने लगाने की ठान ली थी।
केस के खुलासे से एनआईए व परिजन संतुष्ट
डीआईजी ने बताया कि एनआईए के अफसर व तंजील के परिजन मर्डर केस के खुलासे से संतुष्ट हैं। परिजनों को तंजील मर्डर की सारी कहानी बता दी गई है। एसपी सिटी एमएम बेग तंजील के परिजनों से दिल्ली में मिलकर आए है। परिजन केस के खुलासे से संतुष्ट थे।
दोनों घटना के खोखे एक से निकले
डीआईजी के मुताबिक तंजील मर्डर में फोरेसिंक टीम की जांच में मर्डर में इस्तेमाल हुए नाइन एमएम के खोखे व धामपुर की बैंक लूट में मिले नाईन एम एम के खोखे एक जैसे मिले हैं। इससे साफ है कि लूट भी मुनीर ने की थी। लूट के बाद सर्विलांस टीम को सहसपुर में मुनीर की लोकेशन मिली थी, पर वह हाथ नही आया था।