बिजनौर में परिषदीय स्कूलों में बच्चों को परोसे जा रहे मिड-डे मिल के पिछले पांच वर्ष का ऑडिट आनन-फानन में कराने से शिक्षकों में हड़कंप है। शिक्षकों ने इसे तुगलकी फरमान बताया है। ऑडिट के नाम पर शिक्षकों से अवैध वसूली कराने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्राम प्रधान का चुनाव हुए भी एक वर्ष बीत गया है। ऑडिट के नाम पर अवैध वसूली के आरोप भी लगाए हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ ने मामले की जांच कराने की मांग की है और ऑडिट का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को दिए जा रहे मिड-डे मिल का अचानक ऑडिट होने से शिक्षक हक्के बक्के हैं।
शिक्षकों का आरोप है कि आनन-फानन में पिछले पांच वर्ष का ऑडिट कराया जा रहा है। पूरे जिले के ऑडिट के लिए एक ऑडिटर आए हैं। अधिकांश स्कूलों में मिड-डे मिल की व्यवस्था ग्राम प्रधानों के हाथों में है। रसोइयों के माध्यम से ग्राम प्रधान ही स्कूलों में भोजन बनवाते हैं। आए दिन अधिकारियों के दबाव के चलते मनमाने तरीके से शिक्षकों से कंवर्जन कोस्ट के चेक लिए जाते हैं। अब पांच वर्ष का ऑडिट कराने का फरमान जारी कर दिया गया। विभाग की माने तो प्रत्येक वर्ष ऑडिट होना चाहिए था, पर पिछले पांच वर्षों में एकबार भी मिड-डे मिल का ऑडिट नहीं किया गया। अचानक ऑडिट कराने का आदेश शिक्षकों के गले नहीं उतर रहा है। शिक्षकों का कहना है कि ऑडिट के नाम पर शिक्षकों से अवैध वसूली की जा रही है। शिक्षकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नागेश कुमार व जिला महामंत्री प्रशांत चौधरी ने ऑडिट के नाम हो रही मनमानी पर चिंता जताई तथा जांच कराने की मांग की। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत का चुनाव हुए भी एक वर्ष बीत गया। ग्राम प्रधान भी बदल गए हैं। ऐसे में ऑडिट कराना संभव नहीं है। उन्होंने ऑडिट का बहिष्कार करने को कहा है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला मंत्री रितेश कुमार भटनागर ने बताया कि ऑडिट के नाम पर शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा।