बिजनौर में एडीजे धर्मराज मिश्र ने बहुचर्चित चंद्रकांत आत्रेय हत्याकांड में पांचों आरोपियों को चंद्रकांत आत्रेय की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 30-30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सिविल लाइंस निवासी मीरा आत्रेय ने थाना कोतवाली शहर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 12 जनवरी 2013 को शाम करीब चार बजे उनके पति चंद्रकांत आत्रेय के ममेरे भाई गौतम व गौरव निवासी आवास विकास कॉलोनी उनके घर आए और उनके पति को सुरेंद्रनगर ले जाने की बात कहकर अपने साथ ले गए। जब काफी देर तक उनके पति घर नहीं लौटे तो उन्होंने अपने देवर श्रीकांत आत्रेय को सुरेंद्रनगर जाकर देखने को कहा। श्रीकांत आत्रेय जब सुरेंद्रनगर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि गौतम, गौरव व उनका भाई उत्तम तथा गौरव के साले संदीप भारद्वाज व अंकित भारद्वाज चंद्रकांत आत्रेय से मारपीट कर रहे हैं।
श्रीकांत आत्रेय द्वारा शोर मचाने पर आरोपियों ने चंद्रकांत आत्रेय को गोली मार दी और भाग गए। चंद्रकांत आत्रेय की मौके पर ही मौत हो गई। मीरा आत्रेय के अधिवक्ता इंद्रवीर सिंह के अनुसार गौरव व गौतम पर चंद्रकांत आत्रेय की कर्जदारी थी। इसके कारण ही चंद्रकांत आत्रेय की हत्या की गई। शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र शर्मा के अनुसार कोर्ट ने सभी पांच आरोपियों को चंद्रकांत आत्रेय की हत्या का 18 जनवरी को दोषी माना था। शुक्रवार को अदालत ने पांचों आरोपियों गौतम, गौरव, उनके भाई उत्तम तथा गौरव के साले संदीप भारद्वाज व अंकित भारद्वाज को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।