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दहेज उत्पीड़न करने वाले पति को कैद

Mon, 20 Mar 2017 11:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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बिजनौर में एडीजे ओपी वर्मा ने दहेज के लिए उत्पीड़न और जानलेवा हमले की वारदात में पति को सात वर्ष व ससुर, ममेरे ससुर व ननद को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
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कस्बा जलालाबाद निवासी फरीदुद्दीन की पुत्री डॉ. इरम फातिमा का निकाह मेरठ निवासी तारिक अली से फरवरी 2008 में हुआ था। निकाह में मिले सामान से पति व ससुरालवाले खुश नहीं थे। वे दहेज में 15 लाख रुपये की मांग करते थे। मांग पूरी न होने पर डॉ. इरम फातिमा को प्रताड़ित करते थे। मई 2009 में डॉ. इरम फातिमा के पति व ससुरालवालों ने उसे घर से निकाल दिया। आठ जनवरी 2010 को डॉ. इरम फातिमा ने बेटी को जन्म दिया। उसके आठ माह बाद समझौते के बाद डॉ. इरम फातिमा को उसका पति साथ ले गया।
18 नवंबर 2010 को 15 लाख की मांग पूरी न होने पर ससुरालवालों ने फिर से डॉ. इरम फातिमा को घर से निकाल दिया। 17 जुलाई 2011 को महिला का पति तारिक अली, ससुर इस्लाम, सास नूरजहां, ननद आयशा व बुशरा, पति के मामा नदीम डॉ. इरम फातिमा के घर आए और उसे साथ ले गए। डॉ. इरम फातिमा के पति ने मारने के लिए उस पर फायर किया। शासकीय अधिवक्ता महफूज चौधरी के अनुसार, अदालत ने महिला के पति तारिक अली को जानलेवा हमले व दहेज उत्पीड़न का दोषी का मानते हुए सात साल कारावास व 14 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई है। महिला के ममेरे ससुर नदीम, ससुर इस्लाम, ननद आयशा व बुशरा को दो-दो वर्ष के कारावास और चार-चार हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। सास के विरुद्ध चार्जशीट अभी अधीनस्थ न्यायालय में लंबित है।
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