बिजनौर में एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद की पत्नी फरजाना की मौत से पुलिस महकमे को गहरा धक्का लगा है। फरजाना की मौत से तंजील मर्डर का राज भी दफन हो गया। पुलिस अधिकारी यह मानकर चल रहे थे कि फरजाना को होश में आने से केस की तहकीकात में काफी मदद मिल सकती है। फरजाना की मौत के बाद पुलिस की सारी उम्मीद धरी की धरी रह गई ।
एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद के मर्डर की अधूरी कहानी ही सामने आई है। मर्डर की असली वजह क्या रही यह मुनीर के पकड़े जाने के बाद ही पता चलेगा। घटना के दिन से तंजील अहमद की पत्नी फरजाना जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी। फरजाना को चार गोलियां लगी थी। पुलिस इस उम्मीद में थी कि फरजाना बच जाए तो तंजील मर्डर के कुछ असली राज सामने आ सकते हैं। फरजाना को जरूर मालूम होगा कि तंजील के मर्डर का असली कारण क्या रहा है। मुनीर या किसी और से तंजील अहमद की क्या दुश्मनी रही होगी। ये बातें फरजाना जरूर जानती रही होगी। हालांकि पुलिस की सारी उम्मीदों पर फरजाना की मौत से पानी फिर गया। फरजाना ओखला दिल्ली की रहने वाली थी। शादी के बाद से फरजाना दिल्ली में रहना पसंद करती थी।
बच्चों के सिर से उठा मां-बाप का साया
बिजनौर। पहले एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद की हत्या और अब उसकी पत्नी फरजाना की मौत से परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूटा पड़ा है। बच्चों के सिर के ऊपर से मां और बाप का साया उठ गया है। तंजील अहमद की 15 साल की बेटी जिमनिश और 12 साल का बेटा शहबाज मां-बाप के साथ खुशी-खुशी शादी में शामिल होने सहसपुर आए थे। दोनों भाई-बहन को क्या मालूम था कि शादी में आने से उनके ऊपर से मां औक बाप का साया उठ जाएगा। दो अप्रैल की रात बाइक सवार शूटरों ने तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना पर गोलियां बरसाई थी। तंजील अहमद की मौके पर ही मौत हो गई थी। उनकी पत्नी फरजाना को गंभीर हालत में दिल्ली में भर्ती कराया गया था। बुधवार को दिल्ली के एम्स में फरजाना की मौत होने से दोनों बच्चे बुरी तरह टूट गए हैं। भाई-बहनों ने आंखों से मां-बाप पर गोलियां बरसाने का नजारा देखा था। मां और बाप की मौत से परिवार को गहरा सदमा लगा है।
घर से पिता को सलाम करके निकला
बिजनौर। एनआईए अफसर तंजील अहमद के साथ दुश्मनी की कहानी मुनीर के गिरफ्तारी के बाद ही सामने आ पाएगी। वारदात वाले दिन मुनीर अपने घर वैपन के साथ आराम से आकर घर रुका। पुलिस सूत्रों के मुताबिक मुनीर से उसके दोस्त तंजीम , रिजवान , रैय्यान और जैनी उसके घर पर मिलने कई बार गए। किसी को उन पर शक नहीं हुआ। मुनीर ने अपने परिजनों, दोस्तों व रिश्तेदारों के सामने तंजील के मर्डर की पूरी कहानी बयां की। हालांकि किसी ने मुनीर के घर से बाहर आकर अपनी जुबान नहीं खोली। सूत्रों के मुताबिक मुनीर ने तंजील अहमद का मर्डर करने से पहले ही अपने खास दोस्तों व परिजनों को सब कुछ बता दिया था। घर से तीन अप्रैल की सुबह पांच बजे वह अपनी बाइक से बैग लेकर पिता महताब को सलाम करके निकल गया। सूत्रों के मुताबिक तंजील अहमद का मर्डर करने के बाद मुनीर ने अपने दोस्तों और परिजनों को पहाड़ा पढ़ाया। कहा कि इससे आगे कुछ नहीं बोलना। मुनीर इतना शातिर है कि परिजनों पर कोई आफत आने पर भी नहीं टूटता है।
मुनीर की तलाश में पहुंची बिजनौर पुलिस
टांडा। एनआईए अधिकारी तंजील हत्याकांड की जांच का दायरा अंबेडकरनगर तक पहुंच गया है। हत्याकांड के मुख्य आरोपी व दो लाख के इनामी मुनीर की तलाश में बिजनौर पुलिस बीते दिन यहां पहुंची और छानबीन पूरी कर मंगलवार देर रात लौट गई। गौरतलब है कि बीते दिनों एनआईए अधिकारी तंजील अहमद की बिजनौर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें पुलिस को फरार मुख्य आरोपी मुनीर की तलाश है, जिस पर दो लाख रुपये का इनाम भी घोषित हो चुका है। मुनीर की तलाश में ही बिजनौर जिले के धामपुर कोतवाली के इंस्पेक्टर आरएन सिंह के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम बीते दिन एनटीपीसी के गेस्ट हाउस में गोपनीय ढंग से पहुंची। यहां से वह टांडा कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला कस्बा पूरब गई, जहां उसे मुनीर के साथ कथित तौर पर रहने वाले एक युवक की तलाश थी। वह युवक तो मौके पर नहीं मिला लेकिन पुलिस ने उसके पिता से आवश्यक जानकारी प्राप्त की। संबंधित युवक अलीगढ़ यूनीवर्सिटी का छात्र भी बताया जाता है।
मुनीर की गिरफ्तारी बनी सिरदर्द
अलीगढ़। एनआईए अफसर तंजील अहमद हत्याकांड की जांच में लगी ऐजेंसियों के लिए सिरदर्द बने मुनीर की गिरफ्तारी अब टेढ़ी खीर लगने लगी है। वैसे, मर्डर के बाद उसके नेपाल भागने के संकेत मिलने लगे हैं। पुलिस अधिकारियों को लगता है कि यह अंदेशा सही निकला तो उसकी गिरेबांद पर हाथ डालना और मुश्किल हो जाएगा। उसके पास बैंक की कैशवैन से लूटी गई 91 लाख की रकम का अधिकांश हिस्सा आज भी मौजूद होना बताया जाता है। दूसरी तरफ, जांच एजेंसियां मुनीर की किसी गलती का इंतजार कर रही हैं। इसके लिए उससे संबंधित तमाम तरह की जानकारियां जुटाई जा रही हैं। उसका फेसबुक पेज खंगालने पर कई दिलचस्प बातों का पता चला है। स्थानीय पुलिस के मुताबिक, मुनीर अपनी मां और दिल्ली के ओखला में रहने वाली प्रेमिका के ज्यादा करीब है। मुनीर जब भी गांव अपनी मां से मिलने आता है, मोहल्ले के छोटे बच्चों की मदद से अपने साथियों को बुलाती है।
उसकी मां सामान मंगवाने के बहाने मुनीर के दोस्तों को घर बुलाती है। बिहार से लेकर हरिद्वार तक बिजनौर पुलिस, एसटीएफ, एटीएस व एनआईए की टीमें मुनीर की तलाश में लगी हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए एजेंसियाें ने माइक्रो लेवल तैयारी की है।
खुलासे से एनआईए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
मेरठ। तंजील अहमद हत्याकांड का पुलिस ने जिस तरह खुलासा किया है, उससे एनआईए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस अफसरों की मौजूदगी में हत्या के आरोप में पकड़े गए रेयान और जैनुल जैसे आरोप डीएसपी तंजील अहमद पर लगा रहे थे, वह यदि सही हैं तो यह संकेत जाते हैं कि एनआईए अफसर भी भ्रष्टाचार और अपराधियों से गठजोड़ से अछूते नहीं हैं। यही नहीं, पुलिस ने भी अपने खुलासे में कई गंभीर सवाल तंजील अहमद पर खड़े किए हैं। हालांकि, तंजील के परिजन पुलिस के खुलासे को हवा-हवाई बता रहे हैं। मुख्य आरोपी मुनीर के अभी तक न पकड़े जाने से पुलिस का दावा भी संदेह के घेरे में है।
मुंबई हमले के बाद आतंकवादी घटनाओं की जांच और आतंकियों की गतिविधियों पर निगाह रखने के लिए गठित नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) अभी तक किसी भी तरह के आरोपों और विवादों से दूर ही रही है। उसके कामकाज को बेहद गंभीरता से लिया जाता रहा है। तंजील वेस्ट यूपी में आतंकवाद से जुड़े मामलों पर निगाह रखने वाले एनआईए के अफसरों में से एक थे। उनकी हत्या एनआईए के लिए भी एक बड़ा झटका थी। तंजील की वेस्ट यूपी में आतंकियों पर मजबूत पकड़ थी। वह ही वेस्ट में आतंकियों की निगरानी करते थे। उर्दू की अच्छी समझ होने से एनआईए ने पठानकोट एयरबेस हमले की जांच के लिए आई पाकिस्तानी टीम से बातचीत के लिये भारतीय दल में उन्हें शामिल किया था। शुरू में एनआईए ने अपनी जांच में इन तथ्यों को भी शामिल किया था। लेकिन, इसके पहले ही यूपी पुलिस ने ज्यादा तेजी से काम करते हुए निजी रंजिश और प्रॉपर्टी के विवाद के तथ्यों को जुटाते हुये मामला खोल दिया।
तंजील अहमद की हत्या का खुलासा यूपी पुलिस चार दिन पहले ही कर देना चाहती थी। यह लगभग तय भी हो गया था और पिछले शुक्रवार को डीजीपी जाविद अहमद इस मामले का खुलासा करने बिजनौर आ भी गए थे। लेकिन, तंजील के परिजनों से बात करने के बाद उन्होंने माहौल भांपते हुए हत्याकांड के खुलासे से इनकार कर दिया और कहा कि अभी इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जबकि, डीजीपी के बिजनौर आने से पहले ही स्थानीय पुलिस ने तंजील की हत्या की लगभग वही पूरी कहानी मीडिया को लीक कर दी थी। मंगलवार को इसी कहानी पर आईजी बरेली जोन विजयसिंह मीणा ने मामले का खुलासा भी कर दिया। डीजीपी के दौरे से पहले ही रेयान और जैनुल के पकड़े जाने की खबरें मीडिया में आ चुकी थीं।
माना जा रहा है कि डीजीपी के दौरे के समय पुलिस ने एनआईए के दबाव में ही कदम पीछे खींचे थे। एनआईए को यह आशंका थी कि पुलिस ने हत्याकांड के खुलासे के लिये जो तथ्य जुटाए हैं, उससे कहीं न कहीं एनआईए की छवि पर भी विपरीत असर पड़ेगा। उस समय तक पुलिस के पास प्रमाण के रूप में बहुत ज्यादा कुछ था भी नहीं, इसलिये एनआईए यूपी पुलिस को हत्याकांड का खुलासा करने से रोकने का दबाव बनाने में सफल रही। एनआईए के दबाव को देखते हुए पुलिस ने भी और ज्यादा तथ्यों के साथ मामले का खुलासा करने का रास्ता अपनाया। पुलिस की यह भी कोशिश थी कि मुनीर किसी तरह पकड़ में आ जाए तो खुलासे की कहानी ज्यादा पुख्ता हो जाएगी। लेकिन, इसमें सफलता नहीं मिल सकी। हत्याकांड के खुलासे में देरी होने से भी पुलिस दबाव में थी। लेकिन, उसके पास इस बीच इतना कुछ आ चुका था कि वह तंजील की हत्या व्यक्तिगत कारणों से होने की पर्याप्त वजह बता सके। दबाव को देखते हुए ही जिस खुलासे को पहले डीजीपी को करना था, उसे आईजी बरेली जोन से करा दिया गया। हालांकि, पुलिस ने जिस तरह इस केस से पर्दा उठाया है, वह कोर्ट में कैसे टिकेंगे, इन सवालों का जवाब मिलना