बिजनौर। दो भाइयों व बेटे की जलाकर हत्या करने में फांसी की सजा मिलने के बाद इरफान उर्फ नाका की रात जेल में करवट बदलते हुए कटी। इरफान ने किसी से बात भी नहीं की। मंगलवार को जेल अधिकारियों और वकील ने इरफान को बताया कि इस सजा के खिलाफ वह हाईकोर्ट में जा सकता है, लेकिन इरफान पर उनकी बात का असर नहीं पड़ा। वह कहता रहा कि इस तरह घुटकर जीने से कोई फायदा नहीं है। इससे अच्छा है कि उसे जल्द से जल्द फांसी दे दी जाए। इरफान को सोमवार को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी।
कसबा नजीबाबाद के मोहल्ला मुगलूशाह निवासी आरोपी इरफान उर्फ नाका ने दूसरा निकाह कर लिया था। उसका पहली पत्नी से पैदा पुत्र इस्लामुद्दीन इस निकाह से नाराज था। वह पिता की संपत्ति में अपना हिस्सा मांग रहा था। इसे लेकर पिता-पुत्र में विवाद था। आरोपी के भाई नौशाद व इरशाद भी इरफान द्वारा इस्लामुद्दीन को पीटने पर अपने भतीजे इस्लामुद्दीन का पक्ष लेते थे और इस्लामुद्दीन को संपत्ति दिलाना चाहते थे। इससे इरफान तीनों से रंजिश रखने लगा था। इरफान ने छह अगस्त की रात एक ही कमरे में सोए नौशाद, इरशाद व इस्लामुद्दीन के कमरे में अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी थी। बुरी तरह जले तीनों की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इस हत्याकांड में कोर्ट ने मंगलवार को इरफान को फांसी की सजा सुनाई थी। सजा मिलने के बाद से इरफान चुप है। उसे जेल में सामान्य बैरक में बाकी कैदियों के साथ रखा गया है, लेकिन इरफान ने किसी साथी कैदी से बात नहीं की। उसकी पूरी रात करवट बदलते कटी। बुधवार को भी वह गुमसुम रहा। उसकी हालत को देखकर कुछ जेल अधिकारियों व कर्मचारियों ने उससे बात करने की कोशिश की। उन्होंने व वकील ने इरफान को बताया कि सजा के खिलाफ वह हाईकोर्ट जा सकता है। वहां से उसे राहत मिल सकती है, लेकिन इरफान ने कोई बात नहीं की। वह कहता रहा कि फांसी की सजा सुनते के साथ ही घुटन होने लगी है। इस तरह वह कब तक जीता रहेगा। इरफान ने कहा कि इससे अच्छा है कि उसे जल्द से जल्दी फांसी पर लटका दिया जाए।