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लाखन सिंह हत्याकांड में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट निरस्त

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बिजनौर। सीजेएम प्रमोद कुमार ने लाखन सिंह हत्याकांड में पुलिस द्वारा दाखिल की गई फाइनल रिपोर्ट को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में चार आरोपियों को संज्ञान लेते हुए धारा 302 में तलब कर लिया है। कोर्ट ने इस मामले में विवेचक तत्कालीन थानाध्यक्ष सुरेंद्र पचौरी की भूमिका पर भी प्रतिकूल टिप्पणी करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय जांच एवं कार्रवाई हेतु डीजीपी लखनऊ, आईजी जोन व एसपी बिजनौर को अपने आदेश की प्रति भेजने को कहा है।
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पुलिस द्वारा लाखन हत्याकांड में भेजी गई फाइनल रिपोर्ट पर मृतक की पत्नी अर्चना द्वारा आपत्ति दाखिल की गई थी। इसमें उसने कहा था कि उसके पति लाखन सिंह थाना मंडावर के ग्राम कुंदनपुर के ग्राम प्रधान थे। दो सितंबर 2016 की रात रोजाना की तरह वह बैठक पर सोए थे। बेटा रजनीश भी उन्हीं के पास दूसरी चारपाई पर बैठक में ही सोया था। वह सुबह जब चार बजे पशुओं को चारा डालने के लिए उठी और बैठक पर आई तो उसके सामने गांव के ही वीरेंद्र, राजवीर व महावीर ने गांव के ही इस्तेखार से कहा कि मार दे गोली ।बदला ले ले। इस पर इस्तेखार ने तमंचा निकालकर लाखन सिंह को गोली मारी। गोली लाखन सिंह के सीने में लगी। इस दौरान उनका बेटा उठ गया । विनीत भी मौके पर आ गया। वह अपने पति लाखन सिंह को घायल अवस्था में बेटे रजनीश व विनीत के साथ बिजनौर अस्पताल लाई। यहां से लाखन सिंह को गंभीर हालत देखते हुए मेरठ भेज दिया गया। आनंद अस्पताल में उपचार के दौरान लाखन सिंह की तीन सितंबर को मौत हो गई। लाखन सिंह का पोस्टमार्टम मेरठ में ही हुआ। तीन सितंबर को वह पोस्टमार्टम के बाद वापस आई और इस मामले की रिपोर्ट वीरेंद्र, राजवीर, महावीर व इस्तेखार के खिलाफ दर्ज कराई। विवेचक तत्कालीन विधायक के बहुत करीब थे । उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने अभियुक्तों को पकड़ने में कोई रुचि नहीं दिखाई और गलत तौर से फाइनल रिपोर्ट प्रेषित कर दी। रिपोर्ट में कहा था कि लाखन सिंह की लापरवाही से उनका तमंचा चला और बगल के नीचे गोली लगने से लाखन सिंह की मौत हुई। आपत्ति याचिका में वादी के अधिवक्ता इंद्रवीर सिंह ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने अपने बयान में आरोपियों द्वारा हत्या की पुष्टि की है। विवेचक ने गलत तौर से इसे एक्सीडेंटल मौत दिखाकर फाइनल रिपोर्ट पेश की। केस डायरी में आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। आरोपियों को इस हत्याकांड में तलब किया जाए। कोर्ट ने इस मामले में पाया कि केस डायरी में आरोपियों के खिलाफ विचारण हेतु पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं। अदालत ने कहा कि केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्य से लाखन सिंह की लापरवाही पर तमंचा चलकर गोली लगने से मौत होने को विश्वसनीय प्रतीत नहीं होती है। विवेचक ने साक्ष्य उपलब्ध होने के बाद भी हत्या जैसे गंभीरतम अपराध में अज्ञात कारणवश आरोपियों का साक्ष्य लेखबद्ध कर उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए किया है। आरोपियों के खिलाफ विचारण के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। इसलिए उन्हें विचारण के लिए तलब किया जाए और उनके समन 11 सितंबर को कोर्ट में पेशी के लिए जारी किए जाएं।
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