बिजनौर। रामपुर ठकरा को खाली कराने के लिए वन विभाग और प्रशासन ने भले ही पूरे जोर लगा रखे हों, लेकिन ठगों के चंगुल से वे और बाकी किसान नहीं बच पाए। हरियाणा के करनाल के तीन भाइयों ने वन विभाग की 168 बीघा जमीन ढाई करोड़ में तीन लोगों को बेच दी। मेरठ में डिप्टी स्पोर्ट्स ऑफिसर ने भी जमीन खरीदी। इस खरीदारी पर स्टांप ड्यूटी भी दी गई, लेकिन किसी को कानोंकान इसकी भनक तक नहीं लगी। अब जमीन खरीदने वालों ने वन विभाग के खिलाफ हाईकोर्ट में केस डाला है।
गांव रामपुर ठकरा को खाली कराने की कवायद वन विभाग कई साल से करता रहा है। हालांकि मामला कोर्ट में चलने के कारण लंबा खींच गया। गांववाले भी अपनी जमीन बचाने में लगे रहे। वन विभाग के अधिकारी गांव वालों पर ही नजरें गड़ाए रहे और वन विभाग की जमीन को हरियाणा के भूमाफिया ने अपनी बताकर बेच दिया। भू-माफिया ने वन विभाग की 168 बीघा जमीन का करीब ढाई करोड़ में बेच दिया। एक बार में 108 व दूसरी बार में 60 बीघा जमी बेची गई। पिछले साल यह जमीन बेची गई थी। जमीन मथुरा निवासी बलधारी सिंह, मदनपाल व मेरठ जिले के उपक्रीड़ा अधिकारी लक्ष्यराज त्यागी ने खरीदी। लक्ष्यराज त्यागी बिजनौर के ही रहने वाले हैं। जमीन हरियाणा के करनाल निवासी भाइयों पवन, जयपाल और कर्मवीर ने वन विभाग की जमीन उनको बेची। जमीन का बैनामा व दाखिल खारिज का भी किया गया तथा सरकार को स्टांप ड्यूटी तक दी गई, लेकिन इस दौरान तीनों भाइयों ने किसी को जरा भी भनक नहीं लगने दी कि वे वन विभाग की जमीन बेच रहे हैं। बलधारी सिंह का कहना है कि वन विभाग के अधिकारियों ने जमीन पर अपना कोई बोर्ड तक नहीं लगा रखा है। जमीन खरीदने के समय किसी ने उन्हें नहीं बताया कि जमीन वन विभाग की है। लक्ष्यराज त्यागी का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट ने उनका केस स्वीकृत कर लिया है। केस कोर्ट में होने के बाद भी वन विभाग के अधिकारियों ने मनमानी करते हुए उनकी जमीन पर अपना कब्जा ले लिया है।
मचान किए खाली
प्रशासनिक टीम के आने का पता चलने पर गांव वालों में खलबली मच गई। उन्होंने खेतों में बने मचानों से अपने बिस्तर, चारपाई व अन्य सामान ढोने शुरू कर दिए। महिलाएं भी इस काम में लगी रहीं।