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कृषि विभाग में बड़ा गड़बड़झाला

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दो साल बाद भी नहीं मिले कंप्यूटर
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नहटौर (बिजनौर)। कृषि बीज भंडारों पर कंप्यूटर ऑपरेटरों की तैनाती के दो वर्ष बाद भी उन्हें कंप्यूटर सिस्टम नहीं मिल सके हैं। एनजीओ के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटरों की भर्ती की गई थी। उनका मानदेय भी एनजीओ से ही मिल रहा है, लेकिन आज तक उन्हें कंप्यूटर सिस्टम नहीं मिल सका है। कुछ कंप्यूटर ऑपरेटर अपनी नौकरी बचाने के लिए निजी लैपटॉप से खानापूर्ति कर रहे हैं।
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कृषि बीज भंडार पर किसानों के रजिस्ट्रेशन व अन्य कार्यों के लिए अगस्त 2015 में कंप्यूटर ऑपरेटरों की भर्ती की गई थी। सरकार ने एनजीओ के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटरों को केंद्रों पर तैनाती कर दी। मात्र चार हजार के अल्प मानदेय में कंप्यूटर ऑपरेटर काम करने के लिए केंद्रों पर आ गए। सूत्रों के मुताबिक जिला बिजनौर के 11 ब्लॉकों में नहटौर, कोतवाली, हल्दौर, नूरपुर ब्लॉकों में बने कृषि बीज भंडारों पर बिजली तक नहीं है। कंप्यूटर ऑपरेटर की तैनाती तो कर दी गई, लेकिन केंद्रों पर कंप्यूटर सिस्टम नहीं भेजे गए। केंद्रों पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर कार्य करने के लिए कंप्यूटर सिस्टम का इंतजार करते रहें। कंप्यूटर सिस्टम तो नहीं आए लेकिन एक वर्ष बाद कंप्यूटर ऑपरेटरों के बैठने के लिए कुर्सी मेज केंद्रों पर भेजी गई। कंप्यूटर सिस्टम केंद्रों पर नहीं आने से कंप्यूटर ऑपरेटरों की नौकरी फंसती नजर आने लगी। कुछ ऑपरेटर अपने निजी लैपटॉप लाकर केंद्रों पर बैठने लगे। एनजीओ ने भी कुछ कंप्यूटर ऑपरेटरों से सिक्योरिटी लेकर लैपटॉप दिए, लेकिन चार केन्द्रों पर बिजली तक नहीं है। कंप्यूटर ऑपरेटरों का मानदेय भी समय पर नहीं दिया जाता है। पिछले कई माह से वह अपने मानदेय की मांग कर रहे हैं। उप कृषि निदेशक जसपाल सिंह का कहना है कि लखनऊ स्तर से ही कंप्यूटर की आपूर्ति नहीं की गई है।
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