गाय के गोबर से बनाए गए मोक्ष समिधा।
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बिजनौर। सरकारी खर्च और दान पर चलने वाली गोशालाओं की आमदनी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। नगीना स्थित श्रीकृष्ण गोशाला में इसकी शुरूआत की गई है। यहां पर गोमूत्र और गाय के गोबर से अनेक वस्तुएं बनाई जा रही हैं। इन्हें बाजार में बेचकर गोशाला की आमदनी को बढ़ाया जाएगा। गोमूत्र से बने फिनायल का उपयोग सरकारी अस्पतालों में किया जाएगा।
नगीना स्थित श्रीकृष्ण गौशाला में देशी गायों के संवर्धन के लिए अभियान चलाया जा रहा है। यहां पर देशी लाल सिंधी नस्ल के 32 गोवंश हैं। इतनी लाल सिंधी गाय और कहीं पर नहीं हैं। देशी गाय के मूत्र व गोबर में औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। गाय के गोबर व मूत्र से अमृत मिट्टी बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा गोबर से कंडे (उपले) बनाकर बेचे जा रहे हैं। अंतिम संस्कार में देशी गाय के गोबर के उन उपलों का प्रयोग किया जाता है। गोमूत्र का अर्क बनाकर बाजार में बेचा जा रहा है। इसके अंदर अनेक औषधीय गुण होते हैं। सुबह खाली पेट एक चम्मच अर्क पानी में डालकर पीने से शुगर सहित अनेक बीमारियों में लाभ पहुंचता है। अब गोमूत्र से फिनायल बनाने की तैयारी की जा रही है। इससे बने फिनायल का उपयोग सरकारी अस्पतालों में किया जाएगा। डीएम ने भी इस संबंध में गौशाला संचालिका अलका लाहोटी से सूचना मांगी है।
ऐसे बनता है गोमूत्र का अर्क
एक मटके में 75 प्रतिशत गोमूत्र भरा जाता है और 25 प्रतिशत मटका खाली रहता है। मटके के नीचे आग जलाकर गोमूत्र को गर्म किया जाता है। मटके के ऊपर ठंडे पानी से भरा छोटा मटका होता है। इसे शीतयंत्र कहते हैं। विशेष बनावट के कारण यह महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में ही बनता है। गोमूत्र जब भाप बनकर ऊपर उठता है तो वह शीतयंत्र में जाता है। यहां पर भाप फिर से पानी बन जाता है। इस पानी को अर्क कहा जाता है।
एंटी बैक्टिरिया व एंटी फंगल होता है अर्क
इससे बने अर्क में कार्बोनिक एसिड प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। यह दवाइयों सहित साबुन, टूथपेस्ट व सौंदर्य प्रसाधनों में भी डाला जाता है। यह एंटी बैक्टिरिया व एंटी फंगल होता है। गौशाला में तैयार अर्क की 300 एमएल की बोतल 80 रुपये में बिकती है। फिनायल की एक लीटर बोतल की कीमत 70 से 80 रुपये प्रति लीटर रखी गई है। गोशाला की संचालिका अलका लाहोटी के अनुसार गौशाला की आमदनी बढ़ाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। देशी गाय के गोमूत्र से बने अर्क की काफी मांग है। इसे पूरा करने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।