फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाकियू ने अफसरों को घेरा

Fri, 04 Nov 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
विज्ञापन
विज्ञापन
नगीना में भाकियू की ब्लॉक कोतवाली के धरने में बासमती चावल में दाना नहीं पड़ने का मुद्दा उठाया गया। किसानों से वार्ता करने गए अधिकारियों का घेराव कर धरने पर बैठा लिया गया। कार्रवाई के आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ।
विज्ञापन

किसान दोपहर करीब एक बजे गन्ना समिति परिसर में पहुंचे और नारेबाजी करते हुए धरना देकर बैठ गए। जिला महासचिव दिगंबर सिंह ने कहा कि जिले में बासमती धान की फसल में दाना नहीं पड़ने से किसान बेहाल है। किसानों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एसडीएम शिशिर       कुमार, पीडब्लूडी के एई जयगोपाल सिंह, कौड़िया रेंज के उपक्षेत्राधिकारी शिशुपाल सिंह, विद्युत निगम के एसडीओ राहुल गौतम मौके पर पहुंचे तो किसानों ने उनका घेराव कर अपने साथ धरने पर अपने साथ बैठा लिया और किसानों की समस्याएं बताईं। करीब एक घंटा वार्ता के बाद अधिकारियों के आश्वासन पर धरना समाप्त  किया गया। धरने की अध्यक्षता मास्टर धीर सिंह व संचालन जिला सचिव बिजेंद्र सिंह ने किया। धरने में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष धर्मवीर सिंह, विनोद पवार, गजेंद्र सिंह, सुरपाल सिंह, जिलाध्यक्ष रामौतार सिंह, जिला प्रवक्ता मास्टर विजय पाल सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष वीर सिंह डबास आदि मौजूद रहे।
बिजनौर। कृषि विभाग के अधिकारी जिले में धान की फसल खराब होने के लिए मिट्टी में पोटाश की कमी का कारण बता रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है। खुद कृषि विभाग की जांच में पोटाश की कमी सामने नहीं आई है। लेकिन फिर भी पोटाश की कमी बताकर धान की पैदावार कम होने से विभाग पल्ला झाड़ रहा है। किसानों द्वारा मिट्टी की सेहत की जांच के लिए किसान मिट्टी का परीक्षण कराते हैं। पांच साल में कराए गए भूमि परीक्षण रिकॉर्ड के अनुसार जिले में मिट्टी में नाइट्रोजन, जिंक व फास्फोरस की कमी नहीं मिली है। मिट्टी में पोटाश की कमी नहीं मिली है। 20 प्रतिशत नमूनों में पोटाश प्रचुर मात्रा में जबकि 80 प्रतिशत नमूनों में मध्यम रूप में मिला है। कृषि विभाग के अधिकारी पोटाश की भूमि में कमी बताकर बासमती धान की पीबी 6 प्रजाति में दाना न पड़ने की बात कह रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार पोटाश कम होने पर मोटे धान की फसल बासमती से भी अधिक प्रभावित होती है। मोटे धान की फसल के उत्पादन पर असर नहीं पड़ा है, केवल बासमती धान की फसल में ही दाना नहीं पड़ा है। इसका सीधा मतलब है कि जिले की जमीन में पोटाश की कमी नहीं है। भाकियू जिला महासचिव दिगंबर सिंह के अनुसार एकदम से जिले में धान के खेतों में ही पोटाश की कमी कैसे आ सकती है। अगर पोटाश की कमी थी तो कृषि विभाग के अधिकारी खुद ही किसानों को बताते। अब पूरे मामले को दबाने के लिए अधिकारी पोटाश की कमी का बहाना बना रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें