-बाकर नंगला सहकारी संघ लिमिटेड से वेतन निकालने के लिए दिया गया था सचिव को अतिरिक्त चार्ज
- सभापति ने जताया विरोध, सचिव का अतिरिक्त प्रभार हटाया गया
अचल चौधरी
बिजनौर। बीते बीस सालों से आमदनी शून्य और खर्च निकालने के लिए भी व्यापार का कोई साधन नहीं। मगर पुराने दौर में प्रबंध समिति और कर्मचारियों ने कड़ी मेहनत के बाद जो बचत की थी, अब तक उससे वेतन निकलता रहा। यह तस्वीर बाकर नंगला सहकारी संघ लिमिटेड की है। हालांकि अब सभापति ने पुरानी बचत को बचाने के लिए विरोध किया तो सचिव को हटा दिया गया है।
बरुकी में बाकर नंगला के नाम से चलने वाले सहकारी संघ का निर्माण सन 1961 में कराया गया था। संघ को बने 63 साल बीत गए हैं। भवन पूरी तरह से खंडहर हो चुका है। गोदाम खाली हैं। इस संघ के कार्यालय का ताला माह के एक दो बार साफ सफाई और स्वतंत्रता या गणतंत्र दिवस के दिन ध्वजारोहण के लिए खुलता है। या फिर चुनाव के समय चहल पहल रहती है।
अब कोई व्यापारी नहीं होता और आमदनी भी शून्य है। संघ के पास अपनी जमापूंजी की पुरानी बचत का 40 लाख रुपया है जोकि सावधि जमा में है। इस सहकारी संघ पर तीन साल पहले सचिव का अतिरिक्त प्रभार स्योहारा संघ की सचिव को दे दिया गया था। दो जगहों पर तैनाती मगर सचिव का वेतन बाकर नंगला संघ से निकलता रहा।
आमदनी होने के चलते सावधि जमा के खाते से वेतन निकाला जाता रहा। अब पुरानी जमा पूंजी को लगातार कम होता देख मौजूदा सभापति ने सहकारिता के अफसरो से विरोध जताया और वेतन निकासी से इनकार कर दिया। जिस पर उक्त सचिव को बाकर नंगला संघ से हटाकर कहीं और तैनाती दे दी गई।
बैंक शाखा खुलवाने का प्रयास अधर में लटका
बाकर नंगला सहकारी संघ के पास काफी जमीन है। इसके चलते साल 2013 में जमीन का कुछ हिस्सा जिला सहकारी बैंक को दिया गया था। ताकि इसमें भवन बनाकर बैंक की शाखा को खोला जा सके। इससे संघ को भी आमदनी होने लगती, मगर यह प्रयास धरातल पर नहीं उतरा। उधर, सहकारी बैंक की शाखा बरुकी में एक किराए के मकान में चल रही है।
सहकारी संघ का भवन जर्जर है और कोई कर्मचारी नहीं है। आमदनी बढ़ाने के लिए बैंक शाखा खोलने का प्रयास किया गया था, जिस पर कोई अमल नहीं हो रहा है। संघ बंद होने के बाद भी तीन साल तक सचिव की तैनाती रही। जिनका वेतन भी संघ की जमा पूंजी से निकाला गया। - कृष्ण वीर सिंह सभापति, बाकर नंगला सहकारी संघ
पहले सहकारी संघों में सवाई खाद्यान्न का व्यापार होता था। जनता में खाद्यान्न की आवश्यकता कम होती चली गई। ज्यादातर संघों में निष्क्रियता की स्थिति है। सहकारिता मंत्रालय ने सूचनाएं एकत्रित की गई है, जिन्हें पोर्टल पर फीड की गई है। संभावना है कि कोई योजना लाकर संघों को फिर से सक्रिय किया जाएगा। - राजवीर, सहायक निबंधक, सहकारिता