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ठेका किसी के नाम पर, भुगतान किसी और को

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ठेका किसी के नाम पर, भुगतान किसी और को
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बिजनौर। बढ़ापुर के चेयरमैन आबिद अली ने ईओ के साथ मिलकर अंत्येष्ठी स्थल विकास योजना व 14वें वित्त आयोग के धन का गलत तरीके से भुगतान अपने चहेते ठेकेदार को कर दिया। गजब तो ये है कि अंत्येष्ठी स्थल के धन को ठिकाने लगाने के लिए शासन तक की अनुमति नहीं ली गई। डीएम की स्वीकृति लिए बिना 14वें वित्त आयोग के धन का भी सीधे भुगतान कर दिया गया। ठेका किसी के नाम पर चेक दूसरे ठेकेदार के नाम काट दिया गया। यह पूरा खेल ऑडिट रिपोर्ट में पकड़ा गया है। बढ़ापुर के भाजपा विधायक सुशांत सिंह ने जिले के प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल से इस मामले में कार्रवाई कराने को कहा है। डीएम ने एडीएम प्रशासन को इस मामले में जांच कराकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
बढापुर नगर पंचायत में धन को ठिकाने लगाने में सारे नियम कानून ताक पर रख दिए। यह खुलासा 20 अगस्त 2019 की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ापुर के चेयरमैन आबिद अंसारी ने अंत्येष्ठि स्थल विकास योजना का 27 लाख रुपया शासन की बिना अनुमति के अपने चहेते ठेकेदार और अखबार को भुगतान कर दिया। इतना ही नहीं 14वें वित्त आयोग की 33 लाख 40 हजार 433 की धनराशि डीएम से स्वीकृत कराए बिना चहेते ठेकेदारों से मनमाने तरीके से ठिकाने लगवा दी। अंत्येष्टि स्थल का कार्य 58 लाख 29 हजार 509 रुपये में हुआ। यह कार्य शरीफ अहमद के नाम स्वीकृत किया गया था जबकि इसका 50 लाख रुपये का चेक उनका उत्तराधिकारी बताकर अनीस अहमद के नाम काट दिया गया। कई ठेकेदारों को भुगतान करते हुए जीएसटी नहीं काटा गया, जिससे लाखों रुपये के राजस्व की हानि हुई। इस खेल में चेयरमैन के साथ ईओ भी शामिल रहे। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा होने के बाद भी इस घपले में किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नही हुई। तमाम शिकायत को दबा दिया गया। बढ़ापुर के भाजपा विधायक सुशांत सिंह ने जिले के प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल से इसकी शिकायत की तो यह मामला फिर सुर्खियों में आया है। गांव टपरौला निवासी तेजपाल सिंह ने नगरीय विकास निदेशक को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि नगर पंचायत की ओर से एक करोड़ 80 लाख चार हजार 886 रुपये की धनराशि का दुरुपयोग किया गया है।
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धनराशि पर नहीं काटा सेस
श्रम विभाग में निर्माण कार्यों का एक प्रतिशत सेस जमा कराया जाता है। लेकिन विभाग ने सेस जमा नहीं किया। इससे विभाग को पांच लाख 58 हजार 174 रुपये की क्षति हुई। 14वें वित्त व अन्य अनुदानों के बैंक खातों पर अर्जित ब्याज की धनराशि चालान द्वारा निर्धारित लेखा शीर्षक में जमा कर वापस नहीं की गई। इससे आलोच्य अवधि में 21 लाख 63 हजार 909 रुपये के राजस्व की क्षति हुई।
कम प्रसार वाले अखबारों को दिया लाखों का भुगतान
जांच में पाया गया कि बहुत कम प्रसार वाले अखबारों में कई लाख रुपये के विज्ञापन का भुगतान किया गया। यहां तक कि न्यूज चैनल को भी भुगतान हुआ। शिष्टाचार व्यय के नाम पर बिना बिल के एक लाख 80 हजार का भुगतान हुआ। जेनरेटर की मरम्मत के नाम पर 34 हजार 800 रुपये दिए गए। इसमें बेल्ट, बैटरा आदि दिखाया गया, लेकिन पुरानी बैटरी, मोटर की कीमत घटाई नहीं गई। पाइपलाइन मरम्मत का 90 हजार का भुगतान बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के किया गया। कई चेक बिना जीएसटी वाले ठेकेदारों को दिए गए।
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28 दिन की फरवरी में किया 30 दिन का भुगतान
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का एक महीने का भुगतान निर्धारित था। लेकिन फरवरी में 28 दिन होने के बाद भी 30 दिन का भुगतान कर दिया गया। इसमें 18 हजार 338 रुपये का भुगतान ज्यादा कर दिया गया। 14वें वित्त आयोग से कई बिलों का नियमों के खिलाफ भुगतान किया गया।
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