-सड़क निर्माण के लिए डाली जाने लगी मिट्टी
-बिजनौर बैराज मार्ग को सीधे बिजनौर नजीबाबाद मार्ग से जोड़ेगा बाईपास
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। मेरठ पौड़ी नेशनल हाईवे के बिजनौर बाईपास का निर्माण चालू कर दिया गया है। निर्माण का आधार तैयार करने के लिए मिट्टी डाली जा रही है। बिजनौर-नजीबाबाद मार्ग में पेदा की ओर से यह काम चालू किया गया है। यह बाईपास, पानीपत खटीमा नेशनल हाईवे के बाईपास से भी जुड़ जाएगा।
बिजनौर से नजीबाबाद तक फोरलेन हाईवे बनकर तैयार हो चुका है। इसमें स्वाहेड़ी बाईपास को ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है। हालांकि अभी किरतपुर बाईपास खुलना बाकी रह गया है। इस हाईवे पर भनेड़ा में बनाए गए टोल प्लाजा भी ट्रायल भी किया जा चुका है। बता दें कि मेरठ से नजीबाबाद तक हाईवे को फोरलेन किया जाना है। पहले चरण में मेेरठ से बहसूमा और बिजनौर से नजीबाबाद तक निर्माण शामिल था, जोकि अब पूरा हो चुका है।
दूसरे चरण में बिजनौर बाईपास और बहसूमा से बिजनौर तक हाईवे को फोरलेन किया जाना है। बहसूमा की ओर से भी अधिग्रहित जमीन पर कब्जा लिया जा रहा है। इधर बिजनौर में गांव पेदा के पास से बाईपास के लिए मिट्टी डालकर आधार भी तैयार किया जा रहा है। एक सप्ताह में काम में और तेजी आएगी।
जल्द चालू होगा बैराज पर नए पुल का निर्माण
फोरलेन हाईवे के प्रोजेक्ट में गंगा नदी पर पुल का निर्माण प्रस्तावित है। गंगा नदी पर करीब ढाई किलोमीटर लंबा पुल बनाया जाएगा। ढाई किलोमीटर की इस दूरी में गंगा नदी का पुल समेत एलिवेटेड रोड भी शामिल है। नया पुल जाने के बाद बैराज से वाहनों की आवाजाही बंद कर दी जाएगी।
बिजनौर शहर में घट जाएगा वाहनों का दबाव
मेरठ पौड़ी नेशनल हाईवे के बिजनौर बाईपास बन जाने के बाद मेरठ मुजफ्फरनगर से नजीबाबाद और कोटद्वार की ओर आने जाने वाले वाहन बिजनौर शहर के अंदर नहीं आएंगे। जोकि बाईपास से ही होकर निकल जाएंगे। उधर, नगीना की तरफ जाने वाले वाहन भी गांव पेदा के पास ही पानीपत-खटीमा नेशनल हाईवे के बाईपास से होकर निकल जाया करेंगे। इन दोनों बाईपास के चालू होने से बिजनौर में केवल मुरादाबाद की तरफ जाने वाले वाहनों की भीड़ ही रह जाएगी। बाईपास बन जाने की वजह से बिजनौर में चक्कर रोड पर वाहनों का दबाव नहीं रहेगा।
बिजनौर बाईपास निर्माण के लिए काम चालू किया गया है, अभी मिट्टी डाली जा रही है। अगले सप्ताह से काम में तेजी आएगी। एनओसी की शर्त के अनुसार वन विभाग को निर्धारित बजट भी दे दिया गया है। - संजीव वाजपेयी, परियोजना निदेशक