फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पेट भरने की मजबूरी, पढ़ाई से ज्यादा मछली पकड़ना जरूरी

विज्ञापन
बिजनौर - धामपुर में सड़क किनारे तालाब में भरे गंदे पानी से परिजनों के साथ मछलियां पकड़ते बच्चे। - फोटो : DHAMPUR
विज्ञापन
सतीश शर्मा
विज्ञापन

धामपुर (बिजनौर)। सरकार अभियान चला रही है कि सभी बच्चों को शिक्षित किया जाए, स्कूल चलो अभियान के तहत 14 साल तक की आयु का कोई भी बच्चा प्राथमिक शिक्षा से वंचित न रह जाए। अभियान के लिए करोड़ों रुपये भी खर्च किए जा रहे हैं। फिर भी ऐसे अनेक बच्चे हैं जिनके लिए जिनके लिए पढ़ाई से भी ज्यादा जरूरी छोटी उम्र में काम करना है। धामपुर क्षेत्र में किताब और कलम पकड़ने की उम्र के बच्चों के हाथों में मछली पकड़ने का जाल है। सुबह बस्ते की बजाय जाल लेकर निकल पड़ते हैं मछलियां पकड़ने। दिन भर परिजनों के साथ मछली पकड़ने के लिए मशक्कत करते हैं। कहते हैं कि पढ़ाई करेंगे तो परिवार पेट कैसे भरेगा।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार की ओर से 14 साल तक के बच्चों का स्कूलों में नामांकन कराने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाया जा रहा है। हर गांव, नगर में रैली निकाल कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिससे लोग अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर न केवल देश का होनहार बनाएं, बल्कि देश की तरक्की में भी योगदान दें। फिर भी लोग जागरूक नहीं हो पा रहे हैं।
विज्ञापन

अभियान की कमियों को दूर करने का प्रयास करेंगे : बीईओ
खंड शिक्षा अधिकारी प्रीतिपाल सिंह का कहना है कि क्षेत्र के हर गांव में शिक्षक, शिक्षिकाओं की ओर से स्कूली बच्चों की मदद से जागरूकता रैली निकाली जा रही है। सबसे ज्यादा फोकस नामांकन कराने पर है। फिर भी कहीं न कहीं कोई कमी रह जाती है। वह इस कमी को दूर करने का प्रयास करेंगे।
खाने के लिए तो कुछ करना ही पडे़गा
मछली पकड़ने के पेशे से जुड़े दिनेश, जुल्फिकार, सलाउद्दीन का कहना है कि वह भी चाहते हैं कि वे बच्चों को पढ़ाएं, पर जब घर में कुछ खाने के लिए नहीं है तो, बच्चों से काम कराना मजबूरी है। अगर वह मछलियां नहीं पकड़ेंगे तो शाम को रोटी कैसे खाएंगे। पेट भरने के लिए पढ़ाई करने से पहले मछलियां पकड़ना जरूरी है।
विज्ञापन

हर बच्चे का नामांकन पर जोर : बीएसए
बीएसए जयकरन सिंह यादव का कहना है कि विभाग की ओर से स्कूल चलो अभियान को पूरी तरह से सफल बनाने की कोशिश की जा रही है। वह स्वयं स्कूल चलो अभियान को सफल बनाने और एक-एक बच्चे का नामांकन कराने पर जोर दे रहे हैं
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें