फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आत्मा का निर्मल होना उत्तम शौच धर्म

विज्ञापन
नजीबाबाद में दशलक्षण पर्व पर पूजा-अर्चना करते जैन श्रद्घालु। - फोटो : NAZIBABAD
विज्ञापन
आत्मा का निर्मल होना उत्तम शौच धर्म
विज्ञापन

नजीबाबाद। दशलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धालुओं ने उत्तम शौच धर्म की विधि विधान से पूजा अर्चना की। जैन विद्धानों ने कहा कि उत्तम शौच धर्म अर्थात क्रोध, माया और लोभ से मुक्त होना ही उत्तम शौच कहलाता है। आत्मा की निर्मलता होना उत्तम शौच धर्म है।
श्री दिगंबर जैन पंचायती और मौ. संतोमालन स्थित सरजायती मंदिर में श्रद्धालुओं में उत्तम शौच धर्म की पूजा अर्चना और आराधना की। जैन अनुयायी जितेंद्र जैन ने बताया कि जैन श्रावकों के लिए दशलक्षण धर्म सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोभ मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। लोभ के कारण ही भाई, भाई का शत्रु और पुत्र, पिता का शत्रु बना है। समाज में व्याप्त हिंसा, अनाचार, भ्रष्टाचार, चोरी, अपहरण हत्या, अपराध सब लोभ के कारण ही होता है। यदि मनुष्य लालसा, लालच, तृष्णा, अभिलाषा का त्याग कर दे, तो उसकी आत्मा पवित्र हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पूजा अर्चना में पारसनाथ जैन, जनेश्वर प्रसाद जैन, जितेंद्र जैन, दीपक जैन, संदीप जैन, राहुल जैन, नमन जैन, दीपक, सुभाष, सुनीता, नीरज, कुमकुम आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें