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Bijnor News: स्ट्राबेरी के साथ अफजलगढ़ में उगाई जा रहीं चाइनीज फसलेें

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अफजलगढ़। कृष्णा सहकारी खेती समिति लिमिटेड में स्ट्राबेरी के अलावा चेरी टमाटर, चाइनीज कैबिज, लैटियूस आईबर्ग, लैटियूस रेडरोज, लैटियूस ग्रीन जैकेट, ग्रीन जूकनी, येलो जूकनी तथा ब्रोकली आदि की भी खेती की जा रही है। इनका सलाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। इनकी बड़े होटलों में काफी मांग है। वहीं स्ट्राबेरी को बाहर मंडियों में बिक्री के लिए भेजा जाता है। अफजलगढ़ क्षेत्र में पहली बार स्ट्राबेरी की खेती की जा रही है।
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स्ट्राबेरी पूर्व में बाहर से ही बिक्री के लिए नगर व ग्रामीण क्षेत्र में आती थी। वर्तमान में क्षेत्र में ही स्ट्राबेरी सहित अन्य फसलों की खेती की जा रही है। स्ट्राबेरी की बुवाई करने का उचित समय सितंबर से अक्तूबर के बीच का है। लगाने के बाद से दिसंबर माह में यह पौधा फल देने लगता है। स्ट्राबेरी के बुवाई के लिए पौधे लगाए जाते है। स्ट्राबेरी की चांडलर, विंटरडाउन, स्वीट चार्ली तथा कामारोजा आदि किस्में हैं। फार्म में विंटरडाउन प्रजाति की स्ट्राबेरी लगाई गईं हैं। सबसे पहले इसके लिए भूमि को एक फिट ऊंचा तथा ढाई फिट चौड़ा करके तैयार किया जाता है। फिर एक फिट दूरी पर स्ट्राबेरी की पौध रोपित की जाती। इसके बाद इसकी पाॅलीथीन से मलचिंग की जाती है ताकि फल को खरपतवार तथा मिट्टी से बचाव किया जा सके। कृषि वैज्ञानिक व प्रबंधक डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता ने बताया कि पौध को पानी सीधे जड़ों से नहीं दिया जाता है। इसके लिए एक फिट ऊंची व ढाई फिट चौड़ी क्यारी बनाई जाती है। प
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