ऑनलाइन पढ़ाई से कमजोर हो रहीं बच्चों की आंखें
बिजनौर। कोरोना काल में छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई उन्हें आंखों से संबंधित बीमारियां दे रही है। बच्चों से लेकर युवा तक की आंखों की विभिन्न बीमारियों से परेशान हैं। चिकित्सकों का कहना है कि लगातार मोबाइल फोन का प्रयोग और पौष्टिक खानपान नहीं होने के कारण आंखों की रोशनी कम हो रही है।
देश में फैली कोरोना महामारी के कारण पिछले लगभग दस महीने से स्कूल-कॉलेजों की ओर से ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। ऐसे में मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि का प्रयोग बढ़ गया है। ऐसे में पांच-छह साल के बच्चे भी ऑनलाइन क्लासेज में व्यस्त हैं। लगातार मोबाइल और लैपटॉप आदि से पढ़ाई करने से दृष्टि दोष की समस्या उत्पन्न हो रही है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. मनोज सेन के अनुसार बच्चों की आंखें बड़ों की अपेक्षा ज्यादा संवेदनशील होती हैं। उनमें लचीलापन ज्यादा रहता है। ऐसे में लगातार सुबह से देर रात तक टीवी, मोबाइल फोन अथवा लैपटॉप देखने से सिर दर्द, आंखों में खुजली और धुंधलापन आदि की समस्याएं बढ़ रही हैं।
चश्मे के नंबर में आ रहा बदलाव
जिला अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र सर्जन रजनीश कुमार शर्मा बताते हैं कि पांच से दस साल के बच्चों में इसका अधिक प्रभाव पड़ रहा है। आंखों से पानी बह रहा है, आंखों में चुभन हो रही है, आंखों में लाली आदि की समस्या पैदा हो रही है। ऐसे में सरकार को 12 वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज बंद कर देनी चाहिए। ज्यादातर ये समस्या मोबाइल फोन और लैपटॉप आदि से हो रही है। लगातार मोबाइल फोन के प्रयोग से चश्मे के नंबर में बदलाव आ रहा है। साथ ही आंखों की मांसपेशियों पर जोर पड़ने के कारण मायोपिया डेवलप हो रहा है।
मोबाइल फोन ज्यादा नुकसानदायक
नवज्योति नेत्र चिकित्सालय के वरिष्ठ नेत्र सर्जन टीसी अग्रवाल ने बताया कि टेलीविजन अथवा कंप्यूटर की अपेक्षा मोबाइल के स्क्रीन छोटे होते हैं। इसमें आंखों पर दबाव ज्यादा पड़ता है। ऐसे में एक तो आंखों में सूखापन की समस्या हो सकती है। उनके यहां पर तो केवल शहर ही नहीं गांवों तक के बच्चे इलाज कराने आ रहे हैं। इसके साथ ही एलर्जी, आंखों में दर्द, सिर में दर्द, दृष्टि दोष आदि हो सकता है। एकाग्रता (कंस्ट्रेशन) नहीं बन पा रही है।
बच्चों की याददाश्त पर पड़ रहा असर
परफैक्ट विजन आई केयर के संचालक अक्षत कौशिक का कहना है कि लगातार बच्चों की आंखों में थकावट होने से याददाश्त में प्रभाव पड़ सकता है। वैसे तो 12 साल से कम उम्र के बच्चे को मोबाइल फोन देना ही नहीं चाहिए। फिर भी यदि काम नहीं चलता तो एक बार में आधे घंटे से अधिक मोबाइल नहीं देना चाहिए। दो घंटे या इससे अधिक मोबाइल का प्रयोग करने पर मायोपिया का खतरा ज्यादा रहता है। आंखों में सूखापन हो तो अपने चिकित्सक से संपर्क करें। इनके लिए ब्लूलेजर कटलेंस (स्क्रीन की खतरनाक लाइट के असर को कम करने वाले लैंस) का प्रयोग करें।