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केमिकलयुक्त पानी ने मलिन कर दी मालन, मरने लगे जलीय जीव

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बिजनौर के ग्राम रावली में मालन नदी में बहते केमिकलयुक्त पानी को देखते ग्रामीण। - फोटो : BIJNOR
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केमिकलयुक्त पानी ने मलिन कर दी मालन, मरने लगे जलीय जीव
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बेगावाला/बिजनौर। पहाड़ों से औषद्यीय युक्त जल लेकर आने वाली मालन नदी कभी गंगा नदी में मिलने से पहले आसपास की खेती के लिए जीवनदायनी हुआ करती थी। लेकिन अब फैक्टरियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी इस मालन नदी को मलिन कर रहा है। हालात ये हैं कि मालन का स्वच्छ निर्मल जल अब काला पड़ता जा रहा है। इसके साथ ही इसमें पलने वाले जलीय जीवों में खासतौर पर मछलियां मरने लगी हैं। पानी से दुर्गंध भी आ रही है।
इसे प्रदूषण विभाग की अनदेखी कहें या जानबूझकर मालन नदी में छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी से मुंह मोड़ना। कागजों में प्रदूषण विभाग मालन नदी में ऑक्सीजन का स्तर 4 होने का दावा कर रहा है, लेकिन धरातल पर मालन में के मिकल युक्त पानी से जलीय जीवों का दम घुटने लगा है। शुक्रवार को हालात ऐसे थे कि रावली तक मालन का पानी काला पड़ गया। कुछ जगहों पर मछलियां भी मरने लगी, जिन्हें पक्षी उठाकर ले जा रहे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पानी नजीबाबाद की ओर से आ रहा है जो मालन के जल को विषैला कर रहा है।
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हल्दूखाता तक पानी है स्वच्छ
मालन की बात करें तो बिजनौर में प्रवेश स्थल हल्दूखाता तक मालन का पानी स्वच्छ है, इसके नजीबाबाद तक आते आते मालन में यह पानी डाला जा रहा है। ग्रामीणों आरोप है कि एक मिल द्वारा मनमाने तरीके से कैमिकल युक्त पानी नदी में अक्सर छोड़ दिया जाता है। इससे नदी में मछलियों समेत अन्य जीव जंतुओं को नुकसान पहुंचता है।
नमामि गंगे प्रोजेक्ट को भी लगाया जा रहा पलीता
मालन नदी पहाड़ों से निकलकर हरिद्वार, फिर बिजनौर जनपद के नजीबाबाद, किरतपुर, मंडावर, बाकरपुर गढ़ी, मुजफ्फरपुर केशो होती हुई रावली पहुंचती है। रावली में मालन व गंगा का संगम होता है। रावली से निकलते ही मालन नदी गंगा में मिल जाती है और सारी गंदगी गंगा में चली जाती है। एक ओर गंगा को शुद्ध करने का अभियान चल रहा है, वहीं दूसरी ओर अप्रत्यक्ष रूप से गंगा को ही गंदा किया जा रहा है।
शुक्रवार को फिर मरने लगी मछलियां
शुक्रवार को फिर नदी में मछलियां अचानक मरने लगीं। इसकी खबर ग्रामीणों को लगी तो बड़ी संख्या में लोग नदी पर पहुंच गए। ग्रामीण वेदराम, अंकित, ब्रह्मपाल, दिनेश, वीरेंद्र, भजन, पवन आदि का आरोप है कि मिल द्वारा केमिकल युक्त पानी छोड़े जाने से ही ऐसा हुआ है। उन्होंने बताया कि यह जहरीला पानी अक्सर ही नदी में आ जाता है। जहरीले पानी से न सिर्फ मछलियां मर रही हैं, बल्कि पानी में मौजूद अन्य जलीय जीवों को नुकसान पहुंच रहा है।
मवेशियों के बीमार पड़ने का खतरा बढ़ा
नदी में गांव रावली- ब्रह्मपुरी के अलावा आसपास के गांवों के पालतू मवेशी भी पानी पीने आाते हैं। ऐसे में यदि वह इस केमिकल युक्त पानी का सेवन करेंगे तो उनकी भी सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
कार्रवाई हो, नहीं तो करेंगे आंदोलन
नदी में केमिकल युक्त पानी की खबर सामने आने के बाद ग्रामीणों की भीड़ रावली ब्रह्मपुरी के बीच बने रपटे पर इकट्ठा हो गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच करायी जाए और दोषियों को सजा दी जाए। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि नदी में केमिकल का पानी आने से आस पास में बदबू फैल जाती है। ग्रामीणों ने कहा कि गंदे पानी की वीडियो बनाकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत कर दी है। वहीं ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में जल्दी कार्रवाई नहीं हुई तो वह आंदोलन करेंगे।
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प्रदूषण विभाग को कहा जा रहा है, वह इसकी जांच करेंगे। इसका पता कराया जा रहा है। जांच के बाद मालन में केमिकल का पानी डालने वालों पर कार्रवाई कराई जाएगी। उमेश मिश्रा, डीएम
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