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बाल श्रम के खिलाफ कुछ दिन ही चलता है अभियान

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बाल श्रम के खिलाफ कुछ दिन ही चलता है अभियान
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बिजनौर। जिले में बाल श्रम के खिलाफ केवल गिनती के दिनों में ही अभियान चलाया जाता है। बाकी दिन बाल श्रमिकों से बेखौफ होकर काम लिया जाता है। उन पर कोई ध्यान नहीं देता है। केवल कुछ ही दिनों के लिए अभियान चलाकर मामला रफा दफा कर दिया जाता है।
14 साल तक के बच्चे से बाल श्रम कराना अपराध है। साथ ही 14 साल तक के बच्चों को ऐसी जगहों पर काम करने की अनुमति नहीं होती है जहां उन्हें शारीरिक हानि हो सकती हो। जैसे होटल की रसोई, वेल्डिंग की दुकान, ईंट भट्ठों पर ये श्रमिक काम नहीं कर सकते हैं। लेकिन परिवार की आर्थिक परिस्थितियों की वजह से बच्चों को पेट की आग को बुझाने के लिए बाल श्रम करना ही होता है। जिले में भी ईंट भट्ठों व अन्य जगहों पर बाल श्रम किया जाता है। लेकिन बाल श्रम को रोकने के लिए अभियान केवल कागजों पर ही सिमट कर रह जाता है। शासन द्वारा ही बाल श्रम रोकने के लिए कुछ दिन अभियान चलाने की अनुमति दी जाती है। दस या 12 दिन इस अभियान के चलने के बाद पूरे साल के लिए बाल श्रम को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं होती है। कोई यह देखने के लिए नहीं जाता है कि कितने बच्चे अपने बचपन को बाल श्रम की वजह से खत्म करने को मजबूर हैं।
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शासनादेश पर चलता है अभियान
सहायक श्रमायुक्त प्रदीप कुमार का कहना है कि बाल श्रम रोकने के लिए अभियान चलाने को शासन से ही अभियान चलाने की अनुमति दी जाती है। इसके अलावा कोई बाल श्रम की शिकायत करता है तो उस पर डीएम की अनुमति लेने के बाद कार्रवाई होती है। अभियान के समय बाल श्रम वाले स्थानों पर कड़ी कार्रवाई होती है। इसके अलावा समय समय पर बाल श्रमिकों के परिजनों से संपर्क कर उन्हें बाल श्रम करने से रोकने व स्कूल भेजने के लिए भी जागरूक किया जाता है।
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