प्राथमिक विद्यालय प्रथम में बाल्टी से पानी लाती छात्राएं।
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बिजनौर के नहटौर में जंग लगी व्यवस्था के कारण परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सर्वशिक्षा अभियान अपने रास्ते से भटक गया है। व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इसकी बानगी प्राथमिक विद्यालय नहटौर प्रथम में देखने को मिल सकती है।
विभागीय अधिकारियों के आफिस से चंद कदम की दूरी पर स्थित विद्यालय में हैंडपंप खराब पड़ा है। हैंडपंप को सही कराने के लिए कोई सुध लेने को तैयार नहीं है। जिन बच्चों के हाथ में कलम और किताब होना चाहिए, उन बच्चों के हाथ में बाल्टियां हैं। बच्चों को स्कूल आते ही उन्हें पहले पानी ढोना पड़ता है।
सर्वशिक्षा अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालयों में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। व्यवस्था की जवाबदेही देने वाले अधिकारी मौन हैं। अपनी जवाबदेही को समझने को कोई तैयार नहीं है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल खुलते ही बच्चों से पानी भरवाने, झाड़ू लगवाने आदि कार्य कराया जाना आम बात है। प्राथमिक विद्यालय नहटौर प्रथम ब्लॉक के बीआरसी कार्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर बना है। इतना ही नही बीआरसी और प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल एक ही मैदान में स्थित है। कार्यालय पर शिक्षा विभाग के एबीएसए सहित उच्चाधिकारियों का आना जाना भी लगा रहता है। दोनों ही स्कूलों में हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। ऐसे में बच्चों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
प्राथमिक विद्यालय नहटौर प्रथम में 161 बच्चे पंजीकृत है। पांच शिक्षिका स्कूल में तैनात है। पिछले छह माह से हैंडपंप खराब पड़ा हुआ है। स्कूल के सामने थाना परिसर से बच्चे बाल्टियों से पानी ढोते रहते हैं। स्कूल में पढ़ने वाले जिन बच्चों के हाथों में कलम-किताब होनी चाहिए। स्कूल में आते ही उन्हें पानी भरने के लिए बाल्टियां थमा दी जाती है। स्कूल की मुख्य अध्यापिका इमराना खातून ने कहा कि हैंडपंप को सही कराने के लिए दर्जनों बार लिखित में विभाग को अवगत कराया जा चुका है। हालांकि हैंडपंप सही नहीं होने से पानी की समस्या पैदा हो रही है। स्कूल में आए दिन ताले टूटते रहते है। कार्यवाहक खंड शिक्षा अधिकारी सुभाषचंद ने कहा कि हैंडपंप को सही कराने के लिए जल निगम को लिखा जाएगा। समस्या को शीघ्र दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।