बालकिशनपुर रविदास समूह के ब्रश उद्योग को लगे पंख, देश के कई राज्यों में हो रहा निर्यात
सतीश शर्मा
धामपुर। ग्रामीण आजीविका मिशन की महिलाएं रोजगार परक उद्योगों को स्थापित कर आत्मनिर्भर हो रही है। बाल किशनपुर रविदास समूह की महिलाओं के ब्रश उद्योग को विकास के क्षेत्र में पंख लगने शुरू हो गए हैं। समूह का उत्पाद प्रदेश में ही नहीं, देश के कई राज्यों में निर्यात हो रहा है। 1.10 लाख रुपये से शुरू किए उद्योग ने अब करीब पांच लाख रुपये वार्षिक का टर्नओवर शुरू कर दिया है। गांव की कई महिलाओं को भी रोजगार भी दिया जा रहा है।
रविदास समूह की महिला ममता, बीना, मीणा ,बबीता, सुनीता, रूपा, कुंती ,गजरा ने बताया कि 10 साल से स्वयं सहायता समूह में जुड़ी है। उनके समूह का नाम रविदास समूह है। चार साल पहले सरकार ने समूह को रोजगार के लिए 1.10 लाख रुपए दिए थे। इस धनराशि से उन्होंने आपस में मिल कर ब्रश उद्योग स्थापित किया। मेहनत से उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है । गांव की अन्य कई महिलाओं को भी रोजगार भी दे रखा है।
प्रति ब्रश में 150 रुपये की लागत, दो सौ रुपये की बिक्री
महिलाएं बताती है कि एक ब्रश बनाने में करीब 150 रुपये का खर्च आता है। तैयार होने पर खर्चा निकालने के बाद 200 रुपये प्रति ब्रश बेचा जा रहा है। अब उनका माल हर महीने देश के विभिन्न राज्यों उत्तराखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पंजाब आदि में निर्यात हो रहा है। परिवार के पुरुष सदस्य का भी उनके कारोबार को आगे बढ़ाने को प्रोत्साहित कर रहे है। पूरा सहयोग मिल रहा है।
तीबड़ी में कृष्णा समूह बना रहा आंवले का मुरब्बा
गांव तीबड़ी कृष्णा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का कहना है कि वह आंवले का मुरब्बा और पाचन संबंधी ब्रांडेड उत्पाद तैयार कर रही है। उत्पाद को चालू करने से पहले उन्हें नगीना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों की ओर से प्रशिक्षण देकर पारंगत किया गया। अब वह अपने कारोबार को तेजी से आगे बढ़ा रही है। समूह में करीब 10 से 12 महिलाएं अपने परिवार के सदस्यों के साथ कारोबार में लगी हैं।
14 सौ समूह देश तरक्की में दे रहे योगदान
ब्लॉक मिशन मैनेजर पूनम सागर, रेनू भारती, विवेक द्विवेदी का कहना है कि मिशन अधिकारी भी समय-समय पर ग्रुप की महिलाओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं। जहां पर उन्हें उनकी आवश्यकता होती है, मदद की जाती है। ब्लॉक में करीब 1400 महिला समूह कार्यरत हैं, जो देश की तरक्की में योगदान दे रहे हैं।