हल्दौर में स्थित भाई बहन का मंदिर।
- फोटो : BIJNOR
आस्था का प्रतीक है भाई-बहन का मंदिर
हल्दौर। गांव चूड़ियाखेड़ा के जंगल में स्थित प्राचीन भाई-बहन का मंदिर आस्था का प्रतीक बना हुआ है। भैयादूज के अवसर पर मंदिर में भीड़ लगी रहती है। भाई-बहन मंदिर में देव रूपी भाई-बहन के सम्मुख माथा टेक कर एक-दूसरे के जीवन की मंगल कामना करते हैं।
गांव नांगलजट के निकट स्थित बिजनौर नहटौर मार्ग पर गांव चूड़ियाखेड़ा के जंगल में स्थित सतयुग कालीन भाई-बहन का एक प्राचीन मंदिर है। गांव नांगलजट निवासी जितेंद्र कुमार शर्मा, मूलचंद सिंह, डिजेंद्र सिंह, नरेंद्र शर्मा, हरिओम शर्मा, मंगल सैनी के अनुसार उनके पीढ़ी दर पीढ़ी बुजुर्ग बताते चले आ रहे कि सतयुग में एक भाई अपनी बहन को उसकी ससुराल से पैदल लेकर उक्त स्थान से होकर अपने घर लौट रहा था, इसी दौरान कुछ डाकुओं ने दोनों को गांव चुडियाखेड़ा के निकट जबरन रोक लिया और महिला के साथ बदसलूकी और अभद्र व्यवहार करना शुरू कर दिया। युवक को पीटा। इसी दौरान भाई-बहन ने डाकुओं से अपनी रक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और स्वयं को पाषाण का बनाने की मांग की। उसी दौरान भाई-बहन पत्थर की प्रतिमा के रूप में परिवर्तित हो गए और डाकू की प्रताड़ना से बच गए। मंदिर में भाई-बहन की पत्थर की प्रतिमा देवी-देवताओं के रूप में विराजमान है।
भैयादूज और रक्षाबंधन के पर्व पर मंदिर में भारी तादाद में मंदिर में पहुंचकर पूजा अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता भी है कि यहांमंदिर में सच्चे मन से पूजा अर्चना करने से हमेशा भाई-बहनों के जीवन में खुशहाली और प्रगति होती रहती है। मंदिर में साल भर में विभिन्न अवसरों पर विशेष पूजा और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि भाई-बहन के मंदिर में भैयादूज और रक्षाबंधन पर भाई बहनों की भीड़ रहती है।