बिजनौर। भाजपा के नए जिलाध्यक्ष का गठन करने की प्रक्रिया चल रही है। नए जिलाध्यक्ष के चयन को लेकर पार्टी के जनप्रतिनिधि एवं संगठन के लोगों की राय अलग-अलग दिखाई दी है। जनप्रतिनिधियों ने जिलाध्यक्ष पद के लिए अलग-अलग दो दावेदारों के पक्ष में पैरवी की। वहीं संगठन के लोग अपने दावेदार के पक्ष में खड़े हुए। उन्होंने तीसरे के पक्ष में अपनी राय रखी।
भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष के जिलाध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया चल रही है। जिलाध्यक्ष के लिए पुरुषों के साथ महिला कार्यकर्ताओं ने अपनी दावेदारी प्रस्तुत की। गत दो दिन भाजपा के पर्यवेक्षक जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों एवं जनप्रतिनिधियों से वार्ता करने आए। पार्टी सूत्रों के अनुसार जिलाध्यक्ष के चयन को लेकर जनप्रतिनिधि दो गुटों में बंट गए हैं। आधे जनप्रतिनिधियों ने एक के पक्ष, तो दूसरे गुट ने अपने दावेदार के समर्थन में पैरवी की। भाजपा संगठन के पदाधिकारियों को लगा कि नया जिलाध्यक्ष जनप्रतिनिधियों के हित का होगा। यह देख संगठन के लोगों ने जनप्रतिनिधियों से अलग अपने तीसरे दावेदार की पैरवी की और उदाहरण दिया कि संगठन में पुराने कार्यकर्ता का ही चयन किया जाए।
राजनीतिक लोगों में चर्चा है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व की कोशिश थी कि नए जिलाध्यक्ष के चयन में पार्टी में गुटबंदी न हो। इसके लिए भाजपा ने यह प्रक्रिया को अपनाया था। इसमें भी पार्टी के अंदर बिखरा नजर आया। पार्टी का नया जिलाध्यक्ष कौन बनेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। परंतु जिलाध्यक्ष बनने को लेकर कई नामों कयास लगाया जा रहा है।