इस धरती में जन्म लेने वाले ग्राम प्रधानों को इस जगह को प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण स्थल के रूप में विकसित और पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करने में सहयोग करना चाहिए। एसपी दिनेश सिंह ने कहा कि गाय के गोबर एवं मूत्र पर आधारित प्राकृतिक खेती समय की सबसे बड़ी आवश्यता है।
प्राचीन काल में प्राकृतिक खेती का प्रचलन था, जो आज के युग में वातावरण को स्वच्छ एवं स्वास्थ्यवर्धन के लिए और अधिक हो गया। प्रासांगिक, प्राकृतिक खेती प्रक्रिया को पुर्नजीवित करने के प्रयास क्रांतिकारी कदम होगा। इसके बाद अधिकारियों ने कण्व ऋषि अमृत सरोवर की नींव के लिए फावड़ा चलाकर खोदाई की।
नर नारायण की भूमि कहा गयाः डीएम
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि शास्त्रों में इस जगह को नर-नारायण की भूमि कहा गया है। इस जगह को प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा। लोग यहां पर प्रशिक्षण लेने आएंगे, वहीं इस जगह की महत्ता को भी समझेंगे।
बड़ी गोशाला का भी होगा निर्माण
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि प्राकृतिक खेती गाय पर आधारित है, जिसके लिए गोशाला का निर्माण जरूरी है। ताकि गाय के गोबर और मूत्र से प्राकृतिक खेती को किया जा सके। इसलिए कण्व ऋषि आश्रम स्थल पर एक बड़े गोशाला का निर्माण कराया जा रहा है। यहां आने वाली गायों के लिए चारा भी यहीं पर उगाया जाएगा।
खनन या कब्जा करने वालों पर होगी कार्रवाई
अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इस जगह पर किसी ने खनन किया या अवैध कब्जा कर खेती करने का प्रयास किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसे कब्जे से बचाने के लिए डीएम ने एसडीएम सदर को निर्देश दिए। परियोजना निदेशक डीआरडीए को प्रस्तावित कण्व ऋषि सरोवर तालाब का पूरा नक्शा तैयार करने और उसे आकर्षक बनाने के निर्देश दिए।