अपर सत्र न्यायाधीश लोकेश नागर ने पत्नी की हत्या में निजामुद्दीन को दोषी पाया है और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। निजामुद्दीन ने बड़ी बेरहमी से इसराना की हत्या की थी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मुकेश चौहान ने बताया कि शहर कोतवाली में रिहाना पत्नी नौशाद निवासी गांव पेदा ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया कि उसकी बहन इसराना अपने पति निजामुद्दीन निवासी बुल्ला का चौराहा से अलग रहती थी। दोनों के बीच में विवाद और मुकदमेबाजी चल रही है। दो नवंबर 2024 की दोपहर निजामुद्दीन के कहने पर इसराना घर पहुंची। इसराना ने रिहाना को भी अपने घर बुला लिया।
रात में इसराना और निजामुद्दीन छत पर बरामदे में चारपाई पर लेटे हुए थे, जबकि रिहाना कमरे के अंदर थी। सुबह करीब चार बजे निजामुद्दीन ने उसकी बहन इसराना पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए और हत्या कर दी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद विवेचना की। सामने आया कि निजामुद्दीन पत्नी इसराना पर शक करता था, जिसके चलते चाकू से 12 वार कर उसकी हत्या कर दी थी।
पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। अदालत ने अभियुक्त निजामुद्दीन को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है। इस केस में ऑपरेशन कन्विक्शान अभियान के तहत अभियोजन विभाग और पुलिस ने मजबूत तरीके से पैरवी की।