मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन कृषि अनुभाग के निर्देशों के अनुपालन में डीएम ने सचल दस्ते का गठन किया। डीएम ने बताया कि सचल दस्ते द्वारा धान की पराली एवं अन्य कृषि अपशिष्ट को जलाने से रोका जाएगा। साथ ही किसानों को अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में जागरूक करेगा। फसल कटाई के दौरान प्रयोग किए जाने वाला कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस अथवा स्ट्रा रीपर या स्ट्रा रेक एवं बेलर का उपयोग करने को प्रेरित किया जाएगा।
पराली जलाने की सूचना पर जांच करने के उपरांत तहसीलदार द्वारा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति आरोपण के लिए एक कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में दो एकड़ से कम भूमि वाले किसानों को 2500 रुपये प्रति घटना अर्थदंड दिया जाएगा। घटना की पुनरावृत्ति होने पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम की धारा के तहत अभियोजन व अर्थदंड या दोनों से दंडित कराया जाएगा।
24 घंटे के अंदर देंगे घटना की सूचना
डीएम ने कहा कि राजस्व विभाग एवं कृषि विभाग के ग्राम पंचायत एवं न्याय पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारी को उत्तरदायी बनाया जाए कि वह कृषि अपशिष्ट को जलाए जाने की घटना के संबंध में 24 घंटे के अंदर सूचनाएं अपने उच्चाधिकारियों दें।
यह भी पढ़ें: अजूबाः गाय ने दिया ऐसे बछड़े को जन्म, दो मुंह-चार आंख और तीन कान देख हैरत में लोग, खास हैं तस्वीरें
नियुक्त किए गए अधिकारी
तहसील सदर में पर्यवेक्षक अधिकारी एसडीएम, सीओ, नोडल अधिकारी तहसीलदार, कृषि विभाग के उप सम्भागीय कृषि प्रसार अधिकारी (विषय वस्तु विशेषज्ञ) रहेंगे।