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पीले वस्त्रों से करें ज्ञान की देवी मां सरस्वती का शृंगार

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ऋतुराज वसंत का स्वागत : बिजनौर में सरसों के फूल पर बैठी तितली। - फोटो : BIJNOR
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पीले वस्त्रों से करें ज्ञान की देवी मां सरस्वती का शृंगार
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बिजनौर। वसंत पंचमी के पर्व से ही वसंत ऋतु का आगमन होता है। शांत, शीतल और मंद वायु कटु शीत का स्थान ले लेती है। पंडितों के अनुसार वसंत पंचमी सबको नव प्राण और उत्सव से स्पर्श करती है। वसंत को ऋतुओं का राजा अर्थात सर्वश्रेष्ठ ऋतु माना गया है। इस समय पंचतत्व पृथ्वी, आकाश, जल, अग्नि, वायु सभी अपना मनमोहक रूप दिखाते हैं। इस बार 30 जनवरी को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।
हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी यानी मां सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक संस्थान विष्णु लोक के ज्योतिष रत्न शिरोमणि पंडित ललित शर्मा के अनुसार इस बार 30 जनवरी को सूर्योदय से लेकर अपराह्न करीब 01:20 बजे तक पंचमी तिथि रहेगी। जिस दिन उदय तिथि हो तो पूरे दिन उसी तिथि का ही मान होता है। इस कारण उदय कालिक तिथि को ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। अत: 30 जनवरी को मां सरस्वती का पूजन करना श्रेष्ठ व शास्त्र सम्मत होगा। उन्होंने बताया कि वसंत पंचमी के दिन सबसे पहले स्वच्छ पीले वस्त्र पर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करके कलश की स्थापना करें। सर्वप्रथम अपने गुरु महाराज, श्री गणेश भगवान और मां सरस्वती की प्रतिमा को गंगा जल से स्नान करा स्थापित करें।
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सर्वप्रथम गुरु जी, भगवान गणेश और मां सरस्वती की पीत पुष्प की माला, पीले फल अर्पित करके धूप, दीप सुगंध से उनको सुशोभित करें। पंडित ललित शर्मा ने बताया कि मां सरस्वती को पूजन के उपरांत पीले रंग के मिष्ठान का भोग लगाएं। साथ ही ओम हृींग ऐंग हृींग ओम सरस्वतयै नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से बुद्धि प्रखर होकर ज्ञान में वृद्धि होती है। डबराल ज्योतिष सदन के प्रभारी वसंत को सभी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ ऋतु माना जाता है। मुख्यत: विद्यारंभ, नवीन विद्या प्राप्ति, गृह प्रवेश आदि के लिए वसंत पंचमी तिथि को पुराणों में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। उन्होंने बताया कि यदि बच्चों से पूजा-अर्चना कराई जाए तो विशेष फलदायी होती है। पर्वकाल विद्या बुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। उन्होंने बताया कि सरस्वती विद्या की देवी सरस्वती का पूजन काल 01:19 बजे तक है। यह उदयकालिक काल कहलाता है।
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