50 लोग करते हैं काम
फैक्टरी में आगे के हिस्से में दुकानें हैं, जिनमें रखकर माल बेचा जाता हैं। उसके बाद भंडारण का गोदाम व खाली स्थान में बारूद मिलाने का कार्य होता है। इसके पास ही फैक्टरी के अंदर ब बाहर मजदूर पटाखे बनाने का काम करते हैं। फैक्टरी में महिलाओं सहित करीब 50 लोग काम करते हैं। फैक्टरी में मैजिक कलर शॉट के नाम से पटाखा बनाया जा रहा था।
2014 में हुआ था भीषण हादसा
वर्ष 2014 में जनवरी के माह में नहटौर के ही मोहल्ला तीरगरान में पटाखे बनाते समय अंगीठी से निकली चिंगारी के बारूद में पहुंचने से भीषण हादसा हो गया था, जिसमें महिला व एक तीन साल के बच्चे सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी। तीन लोग झुलस गए थे, जोखिम भरे इस कारोबार से एक परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। पहले घनी आबादी में भी पटाखे बनाए जाते थे, लेकिन हादसे होने पर शहर से बाहर इस कार्य को किया जाने लगा।
आधे दिन में पूरी मजदूरी का देते हैं लालच
इस जोखिम भरे कारोबार में अक्सर महिलाएं व किशोर काम में लगाए जाते हैं। आधे दिन में पूरे दिन की मजदूरी मिलने के लालच में वह अपनी जान दांव पर लगाते हैं। इस कारोबार में पटाखा बनाने वाले मजदूर सुबह से दोपहर तक ही काम करते हैं। ऐसे मजदूरों का फैक्टरी में कोई रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता। वर्ष 2014 में हुए विस्फोट के मामले को दबाने के प्रयास में घायलों को अस्पताल में भर्ती न कराकर घरों में उपचार कराया। जिसमें पांच लोगों की जान चली गई।
अप्रशिक्षित होते हैं मजदूर
लाइसेंस होने के बावजूद इस कारोबार में काम करने वाले अधिकतर मजदूर अप्रशिक्षित होते हैं। ऐसे में उन्हें हादसे के समय क्या करना है क्या नहीं, ऐसी बातों का ध्यान नहीं रहता। उन्हें इस कारोबार के जोखिम का कोई अता पता नहीं होता है। जानकारों की माने तो ऐसे हादसों का बड़ा कारण भी यही होता है।
पटाखा फैक्टरी में आग मामले में दो पर मुकदमा दर्ज
पटाखा फैक्टरी में आग लगने के बाद विस्फोट होने पर पुलिस ने दोनों लाइसेंस धारक भाइयों के खिलाफ लापरवाही बरतने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक लाइसेंस धारक मुबारिक व शाहिद के पटाखों के गोदाम में लापरवाही के कारण आग लगने से तालिब व सुहैल और जरीफपुर निवासी महिला मोनी घायल हो गई। लाइसेंस धारक मुबारिक व शाहिद के लापरवाही बरतने के आरोप मे रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। कोतवाल सतेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज होने की पुष्टि की है।