पुश्तैनी कारोबार के आगे बढ़ा रहे कुशल श्रमिक, मालिक
कारखानों में काम करने वाले कुशल कारीगरों, मालिकों शौकत अली, परवेज अख्तर, वसीम अहमद, शाहबाज, मुजीब आदि का कहना है कि यह उनका पुश्तैनी कारोबार है। उनके दादा परदादा भी यहीं करते थे। वे भी इसी तरह से पुश्तैनी धंधे को आगे बढ़ा परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।
परिवार के सभी सदस्य इसी कारोबार में लगे हैं। यहां का कढ़ाव, कढ़ाई और तवा देश के हर कोने में प्रसिद्ध है। गाजियाबाद व अन्य नगरों से कच्चे माल (लोहे की चादरें आदि) को लाकर यहां पर विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट तैयार किया जाते हैं। प्रदेश में बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत, बदायुं, सहारनपुर, मेरठ, अलीगढ़ और आगरा आदि जिलों में पर्याप्त मात्रा में निर्यात होता है।
उन्हें तो लागत के साथ मजदूरी चाहिए
श्रमिकों ने बताया कि छह किलोग्राम वजन की कढ़ाई को तैयार करने में 62 रुपए की लागत आती है जिसे 80 रुपये से ज्यादा की कीमत में बेचा जाता है। एक किलो. वजन के तवे को 58 रुपए की लागत के सापेक्ष 75 से अधिक रुपए में बेचा जाता है। वैसे तो ग्राहक जितना बड़ा और वजन का कढ़ाव चाहे वह बनाकर उपलब्ध करा देते हैं। उन्हें तैयार करने पर लागत और उनकी मजदूरी चाहिए।