हस्तिनापुर सेंक्चुअरी का नाम बदलकर अब राज्य वन्य जीव बारहसिंघा अभयारण्य कर दिया गया है। शासन ने इस नए नाम पर मुहर भी लगा दी है। वहीं, दूसरी ओर अभयारण्य से 200 से ज्यादा गांव बाहर होने के बाद इसके ईको सेंसेटिव जोन के गठन का काम भी तेजी से चल रहा है। अभयारण्य की सीमा बिजनौर, मेरठ समेत पांच जिलों में फैली हुई है।
हस्तिनापुर वन्य जीव विहार की पहली अधिसूचना वर्ष 1986 में की गई थी। मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुजफ्फरनगर, हापुड़ में इसकी सीमाएं फैली हुई है। इसी वर्ष की शुरुआत इसकी नई सूचनाओं की अधिसूचना का प्रख्यापन हो गया। सबसे ज्यादा बिजनौर के 170 गांव इसकी सीमा से बाहर हो गए और अब मात्र बिजनौर और चांदपुर तहसील के मात्र 142 गांव ही इस सीमा के अंदर रह गए हैं। जबकि पांचों जिलों से 200 से ज्यादा गांव बाहर हुए। इसके अलावा इसे लेकर एक बड़ा परिवर्तन इसके नाम को लेकर हुआ है। हस्तिनापुर वन्य जीव विहार मेरठ के नाम को बदलते हुए अब इसका नाम राज्य वन्य जीव बारहसिंघा अभयारण्य कर दिया गया है।
इस अभयारण्य का मकसद बारहसिंघा को संरक्षण देना था। यूं तो कई वर्षों से कोई सटीक गणना नहीं हुई, लेकिन इस समय 450 से ज्यादा बारहसिंघा इस अभयारण्य में होने का अनुमान है। इसके अलावा हिरण, सांभर, चीतल, नीलगाय, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, गंगा में घड़ियाल, डॉल्फिन समेत सैकड़ों प्रजाति के पक्षी, अजगर आदि देखने को मिलते हैं।
इको सेंसेटिव जोन के गठन की प्रक्रिया तेज
हस्तिनापुर अभयारण्य में आने वाले क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, विद्युतीकरण या फिर निर्माण कार्यों पर पाबंदी है। हालांकि बिजनौर और चांदपुर क्षेत्र के अधिकांश इलाके विकसित हो गए थे और इसके पुनर्गठन की आवश्यकता थी। अब जो 170 गांव अभयारण्य से बाहर होने जा रहे हैं, वह विकसित हो सकेंगे। वहीं, दूसरी ओर पांचों जिले के वन अफसर मिलकर इसके इकोसेंसेटिव जोन के गठन पर काम कर रहे हैं। इसी माह के अंतिम सप्ताह या अगले माह के शुरुआत तक इसका गठन भी हो जाएगा।
हैदरपुर समेत 16 वेटलैंड आकर्षण का केंद्र
राज्य वन्य जीव बारहसिंघा अभयारण्य में पक्षियों का बड़ा संसार बसता है। इस कारण यहां पर हैदरपुर वेटलैंड रामसर साइट समेत इसी तरह के 16 वेटलैंड का होना है। भले ही अधिकांश लोग केवल हैदरपुर वेटलैंड को ही जानते हैं, लेकिन इस अभयारण्य में यह बड़ी संख्या में हैं।
हस्तिनापुर वन्य जीव विहार का नाम अब राज्य वन्य जीव बारहसिंघा अभयारण्य हो गया है। इसकी सीमा का पुनर्गठन पहले ही हो चुका है और अब इको सेंसेटिव जोन के गठन पर काम चल रहा है। इसके बाद अभयारण्य में वन्य जीवों के संरक्षण संबंधी कार्य भी किए जाएंगे।
- ज्ञान सिंह, एसडीओ वन विभाग, बिजनौर