दुकान के मालिक विपिन गुप्ता बताते हैं कि साल 1985 में उनके पिता खेमचंद गुप्ता ने जलेबी की दुकान की शुरूआत की थी। वह पहले चाय, पकौड़ी की दुकान करते थे। मगर धीरे-धीरे उन्होंने जलेबी बनानी शुरू की। अब वह केवल जलेबी ही बनाते हैं।
वह रोजाना करीब 30 किलो जलेबी बेचते हैं। ग्राहकों को आना-जाना लगा रहता है। गुप्ता जलेबी को लोगों की पसंद बनाने के लिए उनके पिता ने काफी मेहनत की है। जलेबी में किसी तरह का कोई मसाला नहीं लगाया जाता है।
विपिन गुप्ता ने आगे कहा कि जलेबी वह सिर्फ मैदा, चीनी, घी से बनाते हैं। इसके अलावा अन्य कोई मसाला नहीं लगाते हैं। हालांकि अपनी जलेबी को बेहतर बनाने के लिए वह जलेबी की सिकाई अधिक करते हैं।
पिछले आठ सालों से वह दुकान चला रहे हैं। उनके पिता खेमचंद की तबीयत कुछ खराब रहती है। जिसकी वजह से वह अपने पैतृक व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं। जलेबी को बेहतर बनाने का गुर भी उन्होंने अपने पिता से ही सिखा है।